
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का सीधा प्रभाव दुबई के पर्यटन उद्योग पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। वर्ष 2025 में करोड़ों पर्यटकों की मेजबानी करने वाला यह शहर आज खाली होटलों और सूने रेस्तरां की समस्या से जूझ रहा है। पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक, आय में 50 से 80 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जबकि होटल ऑक्यूपेंसी घटकर महज 15-20 प्रतिशत रह गई है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई व्यवसायों को अपने कर्मचारियों को बिना वेतन अवकाश पर भेजने के लिए मजबूर होना पड़ा है। दुनिया के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल दुबई ने पिछले वर्ष 19.59 मिलियन अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का स्वागत किया था, लेकिन मौजूदा हालात में एयर ट्रैफिक बाधित होने और सुरक्षा चिंताओं के चलते पर्यटकों की संख्या में तेज गिरावट आई है। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, जो रेस्तरां कभी पर्यटकों और स्थानीय लोगों की भीड़ से भरे रहते थे, अब वीरान नजर आ रहे हैं। टाशस हॉस्पिटैलिटी ग्रुप की संस्थापक नताशा साइडेरिस के अनुसार, उनके ग्रुप की आय में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है, जबकि पर्यटकों पर निर्भर आउटलेट्स में यह नुकसान 70-80 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
2.26 लाख से अधिक बुकिंग रद्द
डेटा एनालिटिक्स कंपनी एयरडीएनए के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के पहले ही महीने (28 फरवरी से 29 मार्च) के बीच यूएई में 2,26,500 से ज्यादा शॉर्ट-टर्म बुकिंग्स रद्द कर दी गईं। पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़े होटल और शॉर्ट-टर्म रेंटल सेक्टर पर अब भारी दबाव है, क्योंकि मांग अचानक घट गई है। इस संकट का सबसे अधिक असर दुबई के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में काम करने वाले प्रवासी कर्मचारियों पर पड़ा है। कई लोगों की नौकरियां चली गई हैं, जबकि कई को बिना वेतन छुट्टी पर भेजा गया है। एक दक्षिण एशियाई वेटर ने स्थिति को कोविड-19 काल जैसी बताते हुए कहा कि उन्हें दोबारा नौकरी छूटने और घर लौटने का डर सता रहा है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, पहले से कर्ज के बोझ तले दबे प्रवासियों के लिए यह संकट और गंभीर होता जा रहा है।
क्षेत्रीय स्तर पर अरबों डॉलर के नुकसान की आशंका
ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की इकाई टूरिज्म इकोनॉमिक्स के अनुसार, यदि यह युद्ध लंबा चलता है तो मध्य पूर्व में 2.3 से 3.8 करोड़ कम पर्यटक आ सकते हैं, जिससे 34 से 56 अरब डॉलर तक के पर्यटन राजस्व का नुकसान संभव है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द सामान्य होते हैं तो रिकवरी संभव है, लेकिन संघर्ष लंबा खिंचने पर पूरे समर सीजन पर असर पड़ सकता है।
हवाई यातायात पर गहरा असर, किराए बढ़ने के संकेत
युद्ध ने वैश्विक विमानन उद्योग, खासकर गल्फ हब मॉडल को भी झटका दिया है। दुबई, अबू धाबी और दोहा जैसे प्रमुख ट्रांजिट हब्स पर उड़ानों में व्यवधान, ईंधन संकट और सुरक्षा चिंताओं के कारण संचालन प्रभावित हुआ है। फिलहाल सीमित उड़ानें जारी हैं, लेकिन शेड्यूल में लगातार बदलाव हो रहे हैं और कई रूट्स पर प्रतिबंध लागू हैं। जेट फ्यूल की कीमतें भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि एयरलाइंस की क्षमता में कमी आती है, तो हवाई किराए में बढ़ोतरी तय है। आंकड़ों के मुताबिक, संघर्ष शुरू होने के बाद से मिडिल ईस्ट के लिए 30,000 से अधिक उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं।






