
एक महीने में ही पीएनजी कनेक्शन के 8 लाख नए ग्राहक जुड़े
एलपीजी आपूर्ति में जारी दबाव के बीच देश में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की मांग तेज़ी से बढ़ी है। केंद्र सरकार और गैस कंपनियों की संयुक्त पहल का असर अब स्पष्ट दिख रहा है—बीते एक महीने में करीब 8 लाख नए पीएनजी कनेक्शन जोड़े गए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि बड़ी संख्या में उपभोक्ता अब सिलिंडर के बजाय पाइप लाइन गैस को प्राथमिकता दे रहे हैं। सरकार का लक्ष्य घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में एलपीजी पर निर्भरता घटाकर आपूर्ति को अधिक सुगम और विश्वसनीय बनाना है। हाल के दिनों में सिलिंडर की कमी और लंबी कतारों की खबरों के बीच अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है। पिछले एक महीने में लगभग 50 लाख सिलिंडरों की डिलीवरी की गई, जिससे घरेलू मांग पूरी तरह और वाणिज्यिक जरूरतें करीब 80% तक पूरी हो सकी हैं।
स्वेच्छा से एलपीजी कनेक्शन सरेंडर
इस अभियान का एक सकारात्मक पहलू यह है कि उपभोक्ता खुद आगे आकर अपने एलपीजी कनेक्शन छोड़ रहे हैं। अब तक 16 हजार से अधिक लोग ऐसा कर चुके हैं। जिन घरों में पीएनजी कनेक्शन सक्रिय हो चुका है, वहां के उपभोक्ता सिलिंडर सरेंडर कर रहे हैं, ताकि जरूरतमंदों तक गैस की उपलब्धता आसान हो सके। इसके लिए सरकार ने एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है, जहां कनेक्शन सरेंडर की सुविधा के साथ ‘हॉल ऑफ फेम’ के जरिए ऐसे लोगों को सम्मानित किया जा रहा है।
डिजिटल सिस्टम से बढ़ी पारदर्शिता
गैस वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल माध्यमों को बढ़ावा दिया गया है। वर्तमान में करीब 95% गैस बुकिंग ऑनलाइन हो रही है। वहीं, डिलीवरी के समय ऑथेंटिकेशन कोड के इस्तेमाल में भी तेजी आई है—फरवरी में 53% से बढ़कर यह आंकड़ा अब लगभग 90% तक पहुंच गया है। इससे वितरण प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है।






