
अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम को लेकर जहां एक ओर क्षेत्रीय तनाव में कमी आई है, वहीं अमेरिका की घरेलू राजनीति में इस पर तीखी बहस छिड़ गई है। करीब छह हफ्तों तक चले संघर्ष के बाद हुए इस सीजफायर ने राजनीतिक हलकों में मतभेदों को उजागर कर दिया है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर विपक्ष का दबाव बढ़ता जा रहा है और 85 से अधिक डेमोक्रेट सांसद उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समझौते के तहत दोनों देशों ने अस्थायी रूप से शत्रुता समाप्त करने, 10 बिंदुओं पर आधारित प्रस्ताव पर काम करने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति जताई है। हालांकि, इस कदम को लेकर अमेरिकी राजनीति दो धड़ों में बंटी नजर आ रही है। रिपब्लिकन सांसदों ने इस समझौते को कूटनीतिक सफलता करार दिया है। सांसद मॉर्गन ग्रिफिथ ने राष्ट्रपति ट्रंप की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में यह सीजफायर संभव हो पाया। उनका मानना है कि अमेरिकी सेना के दबाव के चलते ईरान को बातचीत की मेज पर आना पड़ा। वहीं, पेंसिल्वेनिया के कांग्रेसी ब्रायन फिट्जपैट्रिक ने इसे संतुलित कदम बताते हुए कहा कि कूटनीति हमेशा प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने इसे सकारात्मक शुरुआत बताते हुए सतर्कता बरतने की जरूरत पर जोर दिया। सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी सावधानी के साथ समर्थन दिया और कहा कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं तो उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए, लेकिन हर पहलू का गहन मूल्यांकन जरूरी है।
सांसदों ने जताई आपत्ति
दूसरी ओर, कई डेमोक्रेट नेताओं ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। इंडियाना के सांसद फ्रैंक मर्वान ने इसे एकतरफा और खतरनाक करार देते हुए कहा कि इससे स्थिति और बिगड़ सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम के पीछे कोई स्पष्ट रणनीति या लक्ष्य नहीं दिखता और अमेरिकी सैनिक अब भी जोखिम में हैं। कैलिफोर्निया के सांसद केविन काइली ने भी अमेरिका की वैश्विक छवि और संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई पर कांग्रेस की निगरानी अनिवार्य है।
कई नेताओं ने राष्ट्रपति ट्रंप की बयानबाजी को भी विवाद का केंद्र बताया है। सीनेटर लिसा मुर्कोव्स्की ने इसे अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि इस तरह की भाषा न केवल अमेरिका के मूल्यों के खिलाफ है, बल्कि इससे देश और विदेश में नागरिकों की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। एरिजोना के सीनेटर रुबेन गैलेगो ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिकी सेना कानून और नैतिक मूल्यों के तहत काम करती है, ऐसे में किसी भी तरह की चरमपंथी भाषा देश की छवि को नुकसान पहुंचाती है।
कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान युद्धविराम ने जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राहत की उम्मीद जगाई है, वहीं अमेरिका के भीतर इस मुद्दे ने गंभीर राजनीतिक टकराव को जन्म दे दिया है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह कूटनीतिक पहल स्थायी समाधान की ओर बढ़ती है या राजनीतिक विवाद और गहराता है।






