
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनावपूर्ण हालात के बीच घोषित युद्धविराम अब अनिश्चितता के दौर में पहुंचता दिख रहा है। इसी बीच, इस्राइल द्वारा लेबनान पर लगातार किए जा रहे हमलों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है, जिससे शांति प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। ईरान के परमाणु प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यूरेनियम संवर्धन का अधिकार किसी भी संभावित अमेरिका-ईरान समझौते की मूल शर्त रहेगा। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र
28 फरवरी से जारी संघर्ष को रोकने के लिए घोषित सीजफायर फिलहाल अस्थिर नजर आ रहा है। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मुगाद्दम द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई सीजफायर वार्ता से जुड़ी पोस्ट हटाने के बाद कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। इससे न केवल वार्ता की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं, बल्कि पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। युद्धविराम की घोषणा के कुछ ही समय बाद इस्राइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर तीव्र हमले किए, जिसमें 250 से अधिक लोगों की मौत हो गई। ईरान का दावा है कि लेबनान भी युद्धविराम का हिस्सा था, जबकि इस्राइल और अमेरिका इस दावे को नकारते हैं। संभावित शांति वार्ता से पहले सऊदी अरब और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच टेलीफोन पर अहम बातचीत हुई है। इसमें क्षेत्रीय तनाव कम करने और स्थिरता बहाल करने के उपायों पर चर्चा की गई। यह पहल इस ओर इशारा करती है कि ईरान वार्ता से पहले क्षेत्रीय समर्थन मजबूत करने में जुटा है। दुनिया के लगभग 20% तेल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण बना हुआ है। लेबनान पर हमलों के बाद ईरान ने इसे फिर से बंद करने के संकेत दिए हैं। चेतावनी दी गई है कि यदि हमले नहीं रुके, तो इसे पूरी तरह अवरुद्ध किया जा सकता है। वहीं, अमेरिका की ओर से भी सख्त रुख जारी है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेताया है कि समझौते की शर्तों का उल्लंघन होने पर ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
तेल कीमतों में उछाल
होर्मुज में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजार पर भी पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 98.12 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो युद्ध शुरू होने के बाद लगभग 35% की वृद्धि दर्शाती हैं। हालांकि, ईरान ने संकेत दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत जहाजों की आवाजाही जारी रख सकता है, बशर्ते अमेरिका अपनी आक्रामक नीति में नरमी लाए।
अब पूरी दुनिया की नजर इस्लामाबाद में प्रस्तावित बैठक पर टिकी है। यह देखना अहम होगा कि क्या मौजूदा हालात में शांति की कोई ठोस राह निकल पाएगी या यह युद्धविराम केवल अस्थायी विराम बनकर रह जाएगा।





