
न्यायाधिकरण ने कहा, फैसला होने तक उन्हें सेवानिवृत्त न किया जाए
सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के अहम फैसले के बाद मालेगांव बम धमाके मामले में बरी हुए कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित की ब्रिगेडियर पद पर पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त हो गया है। न्यायाधिकरण ने यह स्पष्ट किया कि उनकी वैधानिक शिकायत पर अंतिम निर्णय होने तक उन्हें सेवानिवृत्त नहीं किया जाएगा। कर्नल पुरोहित का नाम वर्ष 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में सामने आया था। उस समय जांच एजेंसियों ने उन पर साजिश में शामिल होने के आरोप लगाए थे, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लंबे समय तक हिरासत में रखा गया। यह मामला शुरू से ही अत्यंत संवेदनशील और विवादों से घिरा रहा। हालांकि, मुंबई की एनआईए अदालत ने 31 जुलाई 2025 को अपने फैसले में कर्नल पुरोहित को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने माना कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप साबित नहीं हो सके। इसके बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि उन्हें सेवा में हुए नुकसान की भरपाई मिल सकती है।
कर्नल पुरोहित ने अपनी पदोन्नति और सेवा से जुड़े लाभों को लेकर न्यायाधिकरण में याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए AFT ने 31 मार्च 2026 को प्रस्तावित उनकी सेवानिवृत्ति पर रोक लगा दी थी। न्यायाधिकरण ने कहा था कि जब तक उनकी वैधानिक शिकायत का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता, तब तक उन्हें सेवा से मुक्त न किया जाए। सूत्रों के अनुसार, अब संबंधित सैन्य अधिकारियों ने कर्नल पुरोहित की शिकायत पर निर्णय ले लिया है, जिसके बाद उन्हें ब्रिगेडियर पद पर पदोन्नति सहित अन्य सेवा लाभ प्रदान किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। न्यायाधिकरण के इस फैसले को कर्नल पुरोहित के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।




