
ऐतिहासिक गुरुद्वारों के करेंगे दर्शन, एसजीपीसी ने वीजा-पासपोर्ट बांटे
मुख्य बिंदु:
- 10 अप्रैल को 2427 सिख श्रद्धालु पाकिस्तान के लिए रवाना
- एसजीपीसी ने वीजा युक्त पासपोर्ट श्रद्धालुओं को सौंपे
- करतारपुर कॉरिडोर खोलने और शुल्क समाप्त करने की मांग तेज
खालसा साजना दिवस और बैसाखी के पावन अवसर पर सिख श्रद्धालुओं का जत्था 10 अप्रैल को अटारी-वाघा सीमा के रास्ते पाकिस्तान के लिए रवाना होगा। इस जत्थे में देशभर से कुल 2427 श्रद्धालु शामिल हैं, जो पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों में मत्था टेकेंगे। पाकिस्तान द्वारा तय कार्यक्रम के अनुसार ही यात्रा की शुरुआत की जा रही है। गुरुवार को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के कार्यालय में श्रद्धालुओं को वीजा लगे पासपोर्ट वितरित किए गए। एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने बताया कि जत्था सुबह 8 बजे एसजीपीसी कार्यालय से रवाना होकर अटारी सीमा के जरिए पाकिस्तान में प्रवेश करेगा।
वीजा प्रक्रिया पूरी, कुछ आवेदन खारिज
इस यात्रा के लिए एसजीपीसी ने 1795 पासपोर्ट वीजा हेतु भेजे थे, जिनमें से 1763 श्रद्धालुओं को दिल्ली स्थित पाकिस्तान दूतावास ने वीजा जारी किया, जबकि 32 आवेदनों को अस्वीकार कर दिया गया। इसके अलावा दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के 409 और हरियाणा की कमेटी के 255 श्रद्धालुओं को भी वीजा मिला है। इस तरह कुल 2427 श्रद्धालु इस धार्मिक यात्रा का हिस्सा बनेंगे।
करतारपुर कॉरिडोर खोलने की उठी मांग
एसजीपीसी अध्यक्ष धामी ने भारत और पाकिस्तान सरकारों से करतारपुर साहिब कॉरिडोर को जल्द दोबारा खोलने की अपील की। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की अपने पवित्र स्थलों के प्रति गहरी आस्था है, इसलिए उनकी धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने करतारपुर साहिब के दर्शन के लिए पासपोर्ट की अनिवार्यता खत्म करने और पाकिस्तान द्वारा ली जाने वाली 20 डॉलर की फीस समाप्त करने की भी मांग की। एसजीपीसी के सचिव बलविंदर सिंह काहलवां ने जानकारी दी कि जिन श्रद्धालुओं को अभी तक पासपोर्ट नहीं मिल पाए हैं, वे रवाना होने से पहले एसजीपीसी कार्यालय से उन्हें प्राप्त कर सकते हैं। यह धार्मिक यात्रा 10 अप्रैल से शुरू होकर 19 अप्रैल तक चलेगी, जिसके बाद जत्था वापस भारत लौटेगा।






