
2029 के लोकसभा चुनावों से पहले लागू करने पर जोर
नारी शक्ति वंदन अधिनियम से बदल जाएगी देश की तस्वीर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण कानून को लागू करने की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होकर इसे संसद में पारित कराने की अपील की है। संसद के विशेष सत्र से पहले उन्होंने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है जब इस महत्वपूर्ण कानून को गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ लागू किया जाए। प्रधानमंत्री ने लोकसभा और राज्यसभा के फ्लोर लीडर्स को पत्र लिखकर इस ऐतिहासिक विधेयक पर सहमति बनाने का आग्रह किया। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि व्यापक चर्चा और विचार-विमर्श के बाद यह निष्कर्ष सामने आया है कि देश में महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करना अब अत्यंत आवश्यक हो गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति महिलाओं की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है। जब महिलाओं को निर्णय लेने और नेतृत्व करने के अवसर मिलते हैं, तभी समाज समग्र रूप से आगे बढ़ता है। उन्होंने इस पहल को विकसित भारत के संकल्प से जोड़ते हुए कहा कि वर्ष 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों तक महिला आरक्षण लागू होना बेहद जरूरी है, जिससे राजनीति में महिलाओं की भूमिका और सशक्त होगी। उन्होंने सभी दलों से संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने में सहयोग की अपील की।
संसद के विशेष सत्र में होगा मंथन
केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें महिला आरक्षण कानून में आवश्यक संशोधनों पर चर्चा और निर्णय लिया जा सकता है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। इसके लागू होने पर लोकसभा की कुल सीटें बढ़कर 816 तक हो सकती हैं, जिनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। हालांकि, मौजूदा प्रावधानों के तहत यह आरक्षण 2027 की जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के पूरा होने के बाद ही लागू हो सकता था, जिससे इसका प्रभाव 2034 के बाद ही दिखाई देता। ऐसे में 2029 के चुनावों से पहले इसे लागू करने के लिए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन आवश्यक हो गया है। इसी उद्देश्य से सरकार ने विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया है।
भाजपा ने जारी किया तीन-लाइन व्हिप
इस विशेष सत्र को लेकर बीजेपी ने अपने सभी सांसदों के लिए तीन-लाइन व्हिप जारी किया है। पार्टी ने लोकसभा और राज्यसभा के सभी सदस्यों, विशेषकर मंत्रियों को 16 से 18 अप्रैल के दौरान सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। इस अवधि में किसी भी प्रकार की छुट्टी की अनुमति नहीं होगी और सभी सांसदों को निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।




