
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने आसाराम की मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत 25 मई 2026 तक बढ़ा दी। अदालत ने पुरानी शर्तें बरकरार रखीं और इलाज के अलावा अन्य गतिविधियों पर रोक जारी रखी।
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को एक बार फिर राहत देते हुए मेडिकल आधार पर दी गई उनकी अंतरिम जमानत 25 मई 2026 तक, अथवा अपील पर अंतिम निर्णय आने तक, बढ़ा दी है। अदालत ने पूर्व में निर्धारित शर्तों को यथावत रखते हुए स्पष्ट किया है कि जमानत अवधि के दौरान उनकी गतिविधियां केवल उपचार तक सीमित रहेंगी। खंडपीठ, जिसमें कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और एक अन्य न्यायाधीश शामिल थे, ने यह भी संज्ञान लिया कि सजा के खिलाफ दायर अपील पर 20 अप्रैल 2026 को सुनवाई पूरी हो चुकी है और फैसला सुरक्षित रखा गया है।
यौन उत्पीड़न मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम वर्ष 2013 से जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं और 2018 में उन्हें दोषी ठहराया गया था। उनकी ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत में दलील दी कि बढ़ती उम्र, गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं और लगातार चल रहे इलाज के मद्देनजर चिकित्सा सुविधा का निर्बाध जारी रहना आवश्यक है। वर्तमान में वे 29 अक्टूबर 2025 से अंतरिम जमानत पर बाहर रहकर उपचार करा रहे हैं। बचाव पक्ष ने यह भी आशंका जताई कि जमानत अवधि न बढ़ाए जाने की स्थिति में इलाज बाधित हो सकता है और उन्हें पुनः जेल में समर्पण करना पड़ेगा।
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने अदालत को अवगत कराया कि जेल प्रशासन द्वारा समय-समय पर समुचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती रही हैं और उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं हुई है। अदालत ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में निर्धारित अधिकांश शर्तों को बरकरार रखा है। हालांकि निगरानी से जुड़ी एक शर्त में आंशिक ढील दी गई है। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत अवधि के दौरान आसाराम किसी भी धार्मिक या सार्वजनिक गतिविधि में हिस्सा नहीं ले सकेंगे, न ही भीड़ जुटाने या देश छोड़ने की अनुमति होगी।






