अगर 20 साल के लिए 50 लाख रुपए का कर्ज लेते हैं, तो जानिए कितनी बनेगी ईएमआई

बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक इस समय होम लोन पर सबसे कम ब्याज दरें पेश कर रहे हैं। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक ने हालिया समीक्षा में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है, फिर भी कई बैंकों ने अपनी ब्याज दरों में मामूली संशोधन किया है। यदि आपने फ्लोटिंग रेट पर होम लोन लिया हुआ है या लेने की योजना बना रहे हैं, तो अपने बैंक के नवीनतम नोटिफिकेशन और स्टेटमेंट्स पर नजर बनाए रखना जरूरी है। भारत में होम लोन की ब्याज दरें ग्राहक के क्रेडिट स्कोर, आय की स्थिरता, लोन राशि और अवधि जैसे कारकों पर निर्भर करती हैं। इसके अलावा, अलग-अलग बैंकों के बीच दरों में अंतर भी देखने को मिलता है।

एसबीआई की बात करें तो देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक वर्तमान में 7.25% से 8.55% तक ब्याज दर पर होम लोन दे रहा है। 800 या उससे अधिक क्रेडिट स्कोर वाले और स्थिर आय वाले ग्राहकों को आमतौर पर न्यूनतम दरों का लाभ मिलता है, जबकि कमजोर क्रेडिट प्रोफाइल पर अधिक ब्याज देना पड़ सकता है। वहीं, निजी क्षेत्र के एचडीएफसी बैंक में वेतनभोगी और स्वरोजगार वाले ग्राहकों के लिए होम लोन की ब्याज दरें 7.75% से लेकर 13.20% तक हैं।

पंजाब नेशनल बैंक 800 या उससे अधिक सिबिल स्कोर वाले ग्राहकों को 30 लाख रुपये से अधिक के होम लोन पर 10 साल तक की अवधि के लिए 8.20% और 10 साल से अधिक अवधि के लिए 8.70% ब्याज दर ऑफर कर रहा है। कम क्रेडिट स्कोर पर ब्याज दर अधिक हो सकती है। सबसे कम ब्याज दर की बात करें तो फिलहाल 7.10% से शुरुआत हो रही है, जो मुख्य रूप से सरकारी बैंकों द्वारा ऑफर की जा रही है।

50 लाख का होम लोन लेने पर 10, 15, 20, 25 एवं 30 वर्ष के लिए ईएमआई

अब बात करें ईएमआई की, यदि आप 50 लाख रुपये का होम लोन 7.10% ब्याज दर पर लेते हैं, 10 साल के लिए ईएमआई लगभग 58,312 रुपये होगी, कुल ब्याज करीब 19.97 लाख रुपये, 15 साल के लिए ईएमआई 45,221 रुपये, कुल ब्याज करीब 31.39 लाख रुपये, 20 साल के लिए ईएमआई 39,066 रुपये, कुल ब्याज करीब 43.75 लाख रुपये, 25 साल की अवधि में ईएमआई 35,659 रुपये और कुल ब्याज लगभग 56.97 लाख रुपये, 30 साल की अवधि में ईएमआई 33,602 रुपये और कुल ब्याज करीब 70.96 लाख रुपये तक पहुंच जाता है।
लोन अवधि बढ़ाने पर ईएमआई तो कम होती है, लेकिन कुल ब्याज का बोझ बढ़ जाता है। इसलिए होम लोन लेते समय केवल ईएमआई नहीं, बल्कि कुल ब्याज लागत को ध्यान में रखकर ही निर्णय लेना चाहिए।







