जबलपुर क्रूज हादसा: बिना बीमा के चल रहा था 20 साल पुराना क्रूज

हादसे की जांच के पहले ही क्रूज तोड़ा

बरगी डैम क्रूज हादसे में 13 लोगों की मौत के बाद एक गंभीर खुलासा सामने आया है। जांच में पता चला है कि करीब 20 साल पुराना यह क्रूज बिना वैध बीमा के संचालित किया जा रहा था, जो केंद्र सरकार के कानून का सीधा उल्लंघन है। वहीं, अधिकारियों के गोलमोल जवाबों ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है। हादसे के तुरंत बाद जांच पूरी होने से पहले ही क्रूज को तोड़ दिए जाने पर भी कई सवाल उठ रहे हैं। जबलपुर के बरगी डैम में 30 अप्रैल को हुए इस दर्दनाक हादसे में 13 लोगों की जान चली गई, जिनमें 4 बच्चे, 8 महिलाएं और 1 पुरुष शामिल हैं। इस घटना ने पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जिस क्रूज में पर्यटक सवार थे, वह बिना वैध बीमा के चल रहा था, जो कि ‘द इनलैंड वेसल्स एक्ट, 2021’ का खुला उल्लंघन है। भारत सरकार के ‘इनलैंड वेसल्स एक्ट, 2021’ के अनुसार, किसी भी यांत्रिक जलयान को अंतर्देशीय जलक्षेत्र में संचालित करने के लिए वैध बीमा अनिवार्य है। इस बीमा में यात्रियों की मृत्यु या चोट की स्थिति में मुआवजा, संपत्ति के नुकसान की जिम्मेदारी, संचालन से जुड़े जोखिम और आकस्मिक प्रदूषण जैसी देनदारियां शामिल होना जरूरी है। इसके बावजूद बरगी में यह क्रूज नियमों को दरकिनार कर चलाया जा रहा था। तकनीकी पहलुओं को लेकर भी कई दावे सामने आए हैं।

पर्यटन निगम के सलाहकार और पूर्व नौसेना कमांडर राजेंद्र निगम के मुताबिक, वर्ष 2024 में क्रूज का मीडियम री-फिट किया गया था, जिस पर लगभग 38 लाख रुपये खर्च हुए। इस दौरान इंजन, शाफ्ट और हुल समेत 17 तकनीकी बदलाव किए गए और करीब 6 महीने की सर्विसिंग के बाद इसे दोबारा संचालन में लाया गया। यह क्रूज वर्ष 2006 में हैदराबाद की एक कंपनी से 70-80 लाख रुपये में खरीदा गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, फाइबर रिइंफोर्स्ड प्लास्टिक (FRP) से बने ऐसे जलयान की उम्र 20 से 25 वर्ष होती है। री-फिट के बाद इसका जीवनकाल लगभग 10 वर्ष तक बढ़ सकता है, जिससे इसे 2029 तक सुरक्षित माना जा रहा था। हालांकि, इन दावों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब क्रूज को हाल ही में ‘सुरक्षित’ बताया गया था, तो हादसे के तुरंत बाद जांच से पहले ही उसे क्यों तोड़ दिया गया? यह बिंदु अब जांच का अहम हिस्सा बन गया है। इस पर निगम का कहना है कि यह सुनिश्चित करना जरूरी था कि अंदर कोई फंसा न हो। रेस्क्यू ऑपरेशन में कठिनाई आने के कारण सुरक्षा के मद्देनजर क्रूज को मौके पर ही काटना पड़ा। उन्होंने बताया कि क्रूज का ढांचा इतना मजबूत था कि उसे काटने में दो जेसीबी मशीनों को करीब 8 घंटे लगे।

अधिकारियों के जवाबों ने बढ़ाई शंका
हादसे के बाद जिम्मेदार अधिकारियों के बयान भी सवालों के घेरे में हैं। जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने मामले को पर्यटन विभाग का बताते हुए पल्ला झाड़ लिया। वहीं, पर्यटन विभाग के सचिव और बोर्ड के प्रबंध निदेशक इलैया राजा ने कहा कि वे फिलहाल रेस्क्यू में व्यस्त थे और दस्तावेज नहीं देख पाए हैं। टूरिज्म बोर्ड के सलाहकार राजेंद्र निगम ने कहा कि भोपाल और हनुमंतिया में क्रूज का बीमा है, लेकिन बरगी के मामले की जानकारी क्षेत्रीय प्रबंधक ही दे सकते हैं। वहीं, रीजनल मैनेजर संजय मल्होत्रा ने भी स्पष्ट जवाब देने से बचते हुए कहा कि वे जानकारी लेकर ही कुछ बता पाएंगे। होटल मैकल रिसॉर्ट एवं बोट क्लब बरगी के निलंबित मैनेजर सुनील मरावी ने दावा किया कि बीमा पॉलिसी मार्च 2026 में समाप्त हो रही थी और इसके नवीनीकरण के लिए आवेदन किया गया था। उनके अनुसार, बीमा कंपनी ने सर्वेयर भेजने की बात कही थी, लेकिन सर्वेयर मौके पर नहीं पहुंचा, जिसके कारण पॉलिसी सक्रिय नहीं हो पाई।

आपराधिक लापरवाही’ का आरोप
सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे ने इस पूरे मामले को ‘आपराधिक पर्यटन’ करार देते हुए कहा कि बिना सुरक्षा और बीमा के लोगों को क्रूज में बैठाना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों—मंत्री, सचिव और प्रबंधन—पर जवाबदेही तय करने और मुआवजा उनकी सैलरी से वसूलने की मांग की। साथ ही यह सवाल भी उठाया कि मौसम विभाग द्वारा येलो अलर्ट जारी होने के बावजूद क्रूज संचालन की अनुमति किसने दी।
इस पूरे मामले में अब कई अहम सवाल खड़े हो गए हैं, जिनके जवाब मिलना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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