असम की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है, जहां हिमंत बिस्व सरमा ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रच दिया। वह राज्य के पहले गैर-कांग्रेसी नेता बन गए हैं, जिन्होंने दो बार लगातार इस पद को संभाला है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व में मिली प्रचंड जीत ने उनके दोबारा मुख्यमंत्री बनने का मार्ग पहले ही स्पष्ट कर दिया था। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के गठबंधन एनडीए ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रिकॉर्ड जीत दर्ज की। इस जीत को पूर्वोत्तर भारत में पार्टी की मजबूत होती राजनीतिक स्थिति का संकेत माना जा रहा है। इसी के परिणामस्वरूप सरमा ने एक बार फिर राज्य की सत्ता की कमान संभाली।

शपथ ग्रहण समारोह बना शक्ति प्रदर्शन
शपथ ग्रहण समारोह बेहद भव्य और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा। इस मौके पर प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष समेत कई वरिष्ठ नेता और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री उपस्थित रहे। राज्यपाल ने हिमंत बिस्व सरमा के साथ चार अन्य विधायकों को भी पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। असम में यह एनडीए गठबंधन की लगातार तीसरी सरकार है। वर्ष 2016 में सर्वनन्द सोनोवाल के नेतृत्व में गठबंधन ने पहली बार सत्ता हासिल की थी। तब से लेकर अब तक भाजपा और उसके सहयोगी दल राज्य की राजनीति में लगातार मजबूत बने हुए हैं। वर्तमान में सोनोवाल केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में कार्यरत हैं।
मंत्रिमंडल में अनुभव और संतुलन
नई सरकार में चार प्रमुख नेताओं को मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है, जिनमें—
- भाजपा से रामेश्वर तेली
- भाजपा से अजयांता नेओग
- असम गण परिषद से अतुल बोरा
- बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट से चरण बोरो
इनमें अजयांता नेओग, अतुल बोरा और चरण बोरो (चंदन ब्रह्मा) पहले भी सरमा के पिछले मंत्रिमंडल का हिस्सा रह चुके हैं, जिससे प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने का संकेत मिलता है। वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री रामेश्वर तेली की वापसी को राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
प्रशासनिक निरंतरता पर विशेष ध्यान
सरकार ने अनुभव को प्राथमिकता देते हुए महत्वपूर्ण विभागों में निरंतरता बनाए रखने का प्रयास किया है।
- अजयांता नेओग पहले वित्त विभाग संभाल चुकी हैं।
- अतुल बोरा कृषि विभाग का अनुभव रखते हैं।
- चंदन ब्रह्मा परिवहन विभाग की जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अनुभवी नेताओं की यह टीम राज्य के विकास कार्यों को गति देने में सहायक होगी।

गुवाहाटी में सख्त सुरक्षा व्यवस्था
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान गुवाहाटी में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ पूरे शहर में कड़ी निगरानी रखी गई। मुख्य सचिव रवि कोटा के नेतृत्व में विभिन्न विभागों ने आयोजन की व्यवस्थाओं का समन्वय किया, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह शपथ ग्रहण समारोह न केवल नई सरकार के गठन का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भाजपा-नेतृत्व वाला एनडीए पूर्वोत्तर भारत में अपनी राजनीतिक पकड़ लगातार मजबूत कर रहा है। हिमंत बिस्व सरमा का दूसरा कार्यकाल राज्य में स्थिरता, सुशासन और विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।






