दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने पूर्व जेएनयू छात्र और दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद को अंतरिम जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान यह निर्णय सुनाते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी। उमर खालिद ने अदालत में 15 दिनों की अंतरिम जमानत की मांग की थी। उन्होंने दलील दी थी कि उनकी मां की सर्जरी प्रस्तावित है, ऐसे में उन्हें उनकी देखभाल के लिए घर पर रहना जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि वे अपने चाचा के चहलुम (मृत्यु के चालीसवें दिन की रस्म) में शामिल होना चाहते हैं, जिनका हाल ही में निधन हुआ था।

हालांकि, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी की अदालत ने दिल्ली पुलिस की आपत्तियों को स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। पुलिस की ओर से दलील दी गई कि उमर खालिद की मां की सर्जरी आपातकालीन नहीं है, जबकि उनके चाचा निकट संबंधी की श्रेणी में नहीं आते। इसके अलावा पुलिस ने यह भी कहा कि खालिद के परिवार में अन्य सदस्य मौजूद हैं, जो उनकी मां की देखभाल कर सकते हैं। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि याचिका में प्रस्तुत कारण पर्याप्त और ठोस नहीं हैं, जिनके आधार पर अंतरिम जमानत दी जा सके। अदालत ने यह भी माना कि परिवार के अन्य सदस्य उनकी मां की देखभाल करने में सक्षम हैं, इसलिए राहत देने का कोई ठोस आधार नहीं बनता। इसी के साथ अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।

गौरतलब है कि उमर खालिद को सितंबर 2020 में दिल्ली दंगों से जुड़े कथित षड्यंत्र के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ दंगा, आपराधिक साजिश, गैरकानूनी गतिविधियां और यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है। दिल्ली पुलिस ने भी अंतरिम जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि मामले में ऐसी कोई असाधारण परिस्थिति नहीं है, जिसके आधार पर उन्हें राहत दी जा सके।






