भोपाल में त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामले में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए जांच को नई दिशा दे दी है। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दोबारा पोस्टमार्टम कराने के आदेश दिए हैं, जिसके लिए दिल्ली स्थित एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भोपाल पहुंचकर पूरी प्रक्रिया को अंजाम देगी। इसी बीच, मामले के मुख्य आरोपी समर्थ सिंह ने अपनी अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली है, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए याचिका निरस्त कर दी। माना जा रहा है कि अब समर्थ सिंह भोपाल की निचली अदालत में आत्मसमर्पण कर सकता है।

हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान कई अहम पहलू सामने आए। मृतका के मायके पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता तुषार मेहता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पक्ष रखा। उन्होंने मामले की गंभीरता पर जोर देते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए दोबारा पोस्टमार्टम की मांग की। कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए तत्काल प्रभाव से नए सिरे से पोस्टमार्टम कराने के निर्देश जारी किए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञों की निगरानी में होगी और इसकी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सीधे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी, ताकि जांच की गोपनीयता और निष्पक्षता बनी रहे। लंबे समय से शव सुरक्षित रखे जाने के कारण उसकी वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान मृतका के ससुराल पक्ष की ओर से शव सौंपने की मांग भी उठाई गई, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल प्राथमिकता निष्पक्ष जांच को दी जाएगी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक किसी भी प्रकार का हस्तांतरण उचित नहीं होगा। इसके अलावा, मामले में मृतका की सास और पूर्व जज गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर भी सुनवाई हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता तुषार मेहता ने दलील दी कि जमानत का दुरुपयोग करते हुए साक्ष्यों को प्रभावित या नष्ट किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इस पर न्यायमूर्ति अवनींद्र सिंह की एकलपीठ ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है।
गिरिबाला सिंह की जमानत रद्द करने संबंधी याचिका पर अगली सुनवाई सोमवार को निर्धारित की गई है। अब पूरे मामले की निगाहें आगामी सुनवाई और एम्स दिल्ली की विशेषज्ञ टीम द्वारा तैयार की जाने वाली पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जो इस मामले की सच्चाई उजागर करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।







