पश्चिम बंगाल में एक अगस्त से व्यापक स्तर पर जनगणना प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जो अगले वर्ष फरवरी के अंत तक चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी। इस महत्वपूर्ण घोषणा के साथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह अभियान पूरी तरह प्रशासनिक और विकासोन्मुख है, जिसका किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधियों से कोई संबंध नहीं है।

मुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में तेजी से बदलते जनसांख्यिकीय स्वरूप पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सीमा पार से हो रही घुसपैठ इसका एक प्रमुख कारण है। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश के साथ लगी सैकड़ों किलोमीटर लंबी सीमा के कई हिस्सों में अब तक बाड़ नहीं लग पाई है, जिससे अवैध आवाजाही को बढ़ावा मिला है। इस कारण राज्य के कई इलाकों में आबादी का संतुलन प्रभावित हुआ है, जो भविष्य की योजना और संसाधन वितरण के लिए चुनौती बन सकता है।

नबन्ना स्थित राज्य सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने आम नागरिकों से अपील की कि वे इस जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें। उन्होंने जोर देकर कहा कि सटीक और अद्यतन आंकड़े ही सुशासन की आधारशिला होते हैं। जनगणना से प्राप्त आंकड़े ही सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत ढांचे जैसी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में सहायता प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि देश के अन्य राज्य जनगणना कार्य में काफी आगे बढ़ चुके हैं, जबकि पश्चिम बंगाल इस दिशा में अपेक्षाकृत पीछे रह गया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि राज्य भी इस अंतर को समाप्त कर अन्य राज्यों के बराबर खड़ा हो। इस दौरान उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि आवश्यक भूमि उपलब्ध न कराने के कारण सीमा सुरक्षा बल (BSF) कई संवेदनशील क्षेत्रों में बाड़ नहीं लगा सका। परिणामस्वरूप, सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ की समस्या बढ़ी और इसका सीधा असर राज्य की जनसंख्या संरचना पर पड़ा।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस अभियान को राज्य के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जनगणना का यह पहला चरण विकास की ठोस नींव रखेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस बार पूरी पारदर्शिता और सटीकता के साथ आंकड़े एकत्र किए जाएंगे, जिससे राज्य की नीतियों और योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। उन्होंने अंत में सभी नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि जनगणना केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि राज्य के समग्र विकास में हर नागरिक की सहभागिता सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।






