कर्नाटक की राजनीति में बुधवार एक अहम दिन साबित होने जा रहा है, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस ऐतिहासिक अवसर को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए 3 जून को आधे दिन की छुट्टी घोषित की है। कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग (डीपीएआर) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह 3 जून को शाम 4:05 बजे कर्नाटक विधानमंडल परिसर में आयोजित किया जाएगा। इस भव्य कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य अतिथि, निर्वाचित जनप्रतिनिधि, पार्टी के वरिष्ठ नेता और आम जनता के शामिल होने की संभावना है, जिससे आयोजन स्थल पर भारी भीड़ उमड़ने के आसार हैं।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने, यातायात नियंत्रण सुनिश्चित करने और पूरे समारोह को सुचारू रूप से संपन्न कराने के उद्देश्य से लिया गया है। प्रशासन को आशंका है कि विधान सौधा और उसके आसपास के क्षेत्रों में अत्यधिक भीड़ और ट्रैफिक दबाव रहेगा। इसी को देखते हुए सरकारी कार्यालयों को 3 जून की दोपहर तक बंद रखने का फैसला किया गया है। यह आदेश राज्यपाल के नाम से डीपीएआर द्वारा जारी किया गया है

मंत्रिमंडल गठन पर तेज हुई कवायद
शपथ ग्रहण से पहले राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। डीके शिवकुमार ने नई दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात कर मंत्रिमंडल गठन और संगठनात्मक नियुक्तियों पर चर्चा की। यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पार्टी हाईकमान कर्नाटक के नए मंत्रिमंडल को अंतिम रूप देने के करीब है। इसमें मंत्री पदों का बंटवारा, उपमुख्यमंत्री पद और संगठनात्मक ढांचे में बदलाव जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं। इससे पहले भी कर्नाटक के वरिष्ठ कांग्रेस नेता नई दिल्ली में पार्टी नेतृत्व के साथ लगातार बैठकों में भाग लेते रहे हैं। कार्यवाहक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल समेत कई प्रमुख नेता इन चर्चाओं में शामिल हुए। वहीं, कर्नाटक कांग्रेस के विधायक प्रियांक खरगे ने भी संभावित मंत्रिमंडल में अपनी भूमिका को लेकर चल रही अटकलों के बीच मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। माना जा रहा है कि इन उच्च स्तरीय बैठकों के बाद जल्द ही नए मंत्रिमंडल की अंतिम रूपरेखा सामने आ सकती है।
कुल मिलाकर, 3 जून का दिन न सिर्फ कर्नाटक के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य की सत्ता संरचना में नए बदलावों की शुरुआत का संकेत भी दे रहा है।





