बड़े भाई के निधन के बाद राहुल गांधी के द्वारा व्यक्तिगत रूप से भेजे गए शोक संदेश से पिघला मन
पंजाब की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हालिया घटनाक्रम इस ओर इशारा कर रहे हैं कि भाजपा के साथ उनके रिश्तों में खटास बढ़ती जा रही है, जबकि कांग्रेस और विशेष रूप से राहुल गांधी के प्रति उनका रुख नरम होता दिखाई दे रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे एक संभावित बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

दरअसल, 27 मई को कैप्टन अमरिंदर सिंह के बड़े भाई राजा रणधीर सिंह के निधन के बाद भाजपा नेतृत्व की ओर से अपेक्षित संवेदनाएं न मिलने से वे काफी आहत बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कैप्टन इस बात से निराश हैं कि जिस पार्टी के लिए उन्होंने कांग्रेस को छोड़ा, उसी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उनके दुख की घड़ी में कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी। इसके विपरीत कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने व्यक्तिगत रूप से शोक संदेश भेजकर संवेदना व्यक्त की। इतना ही नहीं, इससे पहले राहुल गांधी ने उनके जन्मदिन पर भी शुभकामनाएं प्रेषित की थीं, जिसे राजनीतिक विश्लेषक महत्वपूर्ण संकेत मान रहे हैं।

इसी बीच, पंजाब कांग्रेस के कुछ नेताओं का भी कैप्टन के प्रति नरम रुख सामने आया है। इससे यह अटकलें और तेज हो गई हैं कि कैप्टन अमरिंदर सिंह भविष्य में कांग्रेस में वापसी का फैसला ले सकते हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसा होता है तो इसका पंजाब की राजनीति पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। भाजपा के साथ बढ़ती दूरी को उस समय और बल मिला, जब केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कैप्टन पर विवादित टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘बिस्तर पर पड़ा बुजुर्ग’ बताया। साथ ही उन्होंने पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों की खुलकर प्रशंसा की। इस बयान को भाजपा और कैप्टन के बीच बढ़ती खाई के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी ओर, कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हाल ही में कांग्रेस की निर्णय प्रक्रिया की सराहना करते हुए कहा कि कांग्रेस अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं की राय को महत्व देती है, जबकि भाजपा में निर्णय ऊपर से थोपे जाते हैं। उनके इस बयान को कांग्रेस नेतृत्व के प्रति सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि वर्ष 2021 में कांग्रेस छोड़ते समय कैप्टन ने गांधी परिवार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने सोनिया गांधी को भेजे अपने इस्तीफे में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों में उनके बदले हुए तेवर इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। कुल मिलाकर, कैप्टन अमरिंदर सिंह की राजनीतिक दिशा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन उनके हालिया बयानों और घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में पंजाब की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।






