पंजाब विधानसभा में धर्म ग्रंथों की बेअदबी विरोधी विधेयक सर्वसम्मति से पारित

धर्म ग्रंथों की बेअदबी करने पर लेकर 20 लाख तक जुर्माना और आजीवन कारावास की सज़ा

पंजाब विधानसभा ने सर्वसम्मति से बेअदबी रोधी विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस कानून में धार्मिक ग्रंथों का अपमान करने पर उम्रकैद और भारी जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।
आम आदमी पार्टी की सरकार ने 14 जुलाई को यह विधेयक विधानसभा में पेश किया था, जिसे 15 जुलाई 2025 को पास कर दिया गया। इसमें किसी भी पवित्र धर्मग्रंथ की बेअदबी करने वालों को उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के तीसरे दिन की कार्यवाही से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘पंजाब पवित्र धर्मग्रंथों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम विधेयक, 2025’ को मंजूरी दे दी गई।
बीते कुछ वर्षों में राज्य में पवित्र ग्रंथों और धार्मिक स्थलों की बेअदबी की कई घटनाएं सामने आई थीं। इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री ने यह विधेयक सदन में चर्चा के लिए पेश किया। हालांकि विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि विधेयक पर राय व्यक्त करने के लिए उन्हें थोड़ा और समय चाहिए। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने चर्चा अगले दिन तक स्थगित कर दी थी। विधेयक में कहा गया है कि किसी भी पवित्र ग्रंथ को अपवित्र करना, उसे नुकसान पहुंचाना, जलाना, फाड़ना या नष्ट करना दंडनीय अपराध होगा। ऐसे अपराध संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-शमनीय माने जाएंगे। इनकी जांच पुलिस उपाधीक्षक या उससे उच्च अधिकारी द्वारा की जाएगी और मुकदमा सत्र न्यायालय में चलेगा।
कानून में प्रावधान है कि दोषी व्यक्ति को 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा दी जा सकती है। इसके अलावा ₹5 लाख से ₹10 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। अगर किसी ने बेअदबी का प्रयास किया तो उसे 3 से 5 साल की सजा और ₹3 लाख तक जुर्माना हो सकता है। यदि किसी की हरकत से सांप्रदायिक तनाव या हिंसा होती है, किसी की जान जाती है या संपत्ति को नुकसान पहुंचता है तो ऐसे अपराधियों को 20 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और ₹10-20 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। ऐसे मामलों में दोषियों को न पैरोल मिलेगा न फर्लो।
इस कानून के तहत गुरु ग्रंथ साहिब, भगवद गीता, बाइबिल और कुरान जैसे धर्मग्रंथों को अपवित्र करने पर कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2016 में अकाली-भाजपा सरकार ने भी इसी तरह का विधेयक लाने की कोशिश की थी, जिसमें सिर्फ गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान पर उम्रकैद की सिफारिश थी। लेकिन केंद्र सरकार ने इसे मंजूरी नहीं दी थी, यह कहते हुए कि संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप में सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।
2018 में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने गुरु ग्रंथ साहिब, भगवद गीता, कुरान और बाइबिल के अपमान पर उम्रकैद की सजा वाले दो विधेयक पास किए थे, पर उन्हें भी राष्ट्रपति की स्वीकृति नहीं मिली। पंजाब खुफिया विभाग के मुताबिक पिछले पांच सालों में 100 से ज्यादा बेअदबी की घटनाएं हुई हैं। हालांकि भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 298, 299 और 300 में ऐसे अपराधों का जिक्र है, लेकिन वे पर्याप्त नहीं मानी गईं। इसलिए यह नया कानून लाया गया ताकि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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