चंडीगढ़: ज़ीरकपुर की एक महिला से दुष्कर्म मामले में पादरी बजिंदर सिंह समेत सात लोगों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया था। अदालत ने इनमें से पांच लोगों को बरी कर दिया है, जबकि एक आरोपी सुच्चा सिंह की ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी। मोहाली की अदालत ने पादरी बजिंदर सिंह को महिला से दुष्कर्म का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट से दोषी ठहराए जाने के बाद पुलिस ने पादरी को हिरासत में ले लिया और अब वह पटियाला जेल में बंद है।
पीड़िता के वकील, एडवोकेट अनिल सागर ने बताया कि बजिंदर सिंह एक आध्यात्मिक नेता के रूप में प्रसिद्ध है और उसके अनुयायी उसे ‘पापा जी’ कहकर पुकारते थे। उन्होंने कहा कि जब ऐसा गंभीर अपराध किसी आध्यात्मिक नेता द्वारा किया जाता है, तो उसे कठोर सजा मिलनी चाहिए। हम अदालत के फैसले से संतुष्ट हैं और अब वह अपनी अंतिम सांस तक जेल में रहेगा। फैसला सुनने के बाद कोर्ट में पीड़िता बेहोश हो गई। होश में आने के बाद उसने कहा कि उसे न्यायपालिका पर पूरा विश्वास था और इस फैसले ने अन्य पीड़ित महिलाओं के लिए भी एक मिसाल कायम की है। सोमवार को पादरी बजिंदर सिंह अदालत में पेश हुआ था, जिसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी
पादरी बजिंदर सिंह को पहले भी गिरफ्तार किया गया था। जब वह इंग्लैंड के बर्मिंघम में एक सेमिनार में शामिल होने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट से फ्लाइट लेने पहुँचा था, तभी उसे गिरफ्तार किया गया था। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें पादरी महिला से मारपीट करते हुए नज़र आ रहा था। यह वीडियो 14 फरवरी का था, जो 16 मार्च को वायरल हुआ, जिसमें पादरी महिला को थप्पड़ मारते और उसके मुंह पर कॉपी फेंकते हुए दिखाई दिया था।
पीड़िता ने सुरक्षा की मांग की
दोषी करार दिए जाने के बाद पीड़िता ने मीडिया के सामने आकर कहा कि पादरी बजिंदर सिंह एक साइको है और अगर वह जेल से बाहर आया तो फिर से अपराध कर सकता है। उसने कहा कि वह इस फैसले से बहुत खुश है क्योंकि यह सिर्फ उसकी नहीं बल्कि कई लड़कियों की जीत है। पीड़िता ने पंजाब के डीजीपी से सुरक्षा की मांग करते हुए कहा कि उसे और उसके पति को खतरा है और भविष्य में उन पर हमले हो सकते हैं। उसने आशंका जताई कि उनके खिलाफ झूठे मामले भी दर्ज किए जा सकते हैं, जैसा कि पहले भी हुआ है।





