मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां शादी का झांसा देकर एक युवती के साथ लंबे समय तक कथित शारीरिक शोषण करने के आरोप में डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। मुरैना में पदस्थ रहे डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर के खिलाफ 32 वर्षीय युवती ने सिविल लाइन थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने दुष्कर्म सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज करते हुए आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है।

पीड़िता के अनुसार, वर्ष 2025 की शुरुआत में उसकी पहचान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के माध्यम से अरविंद माहौर से हुई थी। उस समय माहौर सबलगढ़ में एसडीएम के पद पर कार्यरत थे। बातचीत धीरे-धीरे बढ़ती गई और दोनों के बीच मुलाकातों का सिलसिला शुरू हो गया। युवती का आरोप है कि माहौर ने उससे शादी करने का वादा किया और इसी विश्वास में आकर उसने कई बार शारीरिक संबंध बनाए। शिकायत में उल्लेख है कि 30 मार्च 2025 को आरोपी उसे घुमाने के बहाने मुरैना रेस्ट हाउस के पीछे ले गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया। इसके बाद सरकारी आवास और ग्वालियर स्थित एक फ्लैट में भी कई बार उसका शोषण किया गया। पीड़िता ने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि आरोपी अधिकारी ने शादी के बदले पांच करोड़ रुपये नकद और एक महीने के लिए उसे किसी अन्य व्यक्ति के साथ भेजने जैसी आपत्तिजनक शर्तें रखीं। शिकायत में मोबाइल फोन में मौजूद वीडियो और अन्य साक्ष्यों का भी जिक्र किया गया है, जिन्हें पुलिस जांच में शामिल किया गया है। युवती का कहना है कि जब उसने आरोपी पर शादी के लिए दबाव बनाया, तो उसने साफ इंकार कर दिया। इतना ही नहीं, शिकायत करने पर पूरे परिवार को जान से मरवाने की धमकी भी दी गई।
मामले की जांच जारी
सिविल लाइन थाना प्रभारी उदय भान यादव के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को बुधवार रात गिरफ्तार कर लिया गया। गुरुवार को मेडिकल जांच के बाद उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के बाद आरोपी का ब्लड प्रेशर बढ़ गया था, जिसके चलते सुबह करीब 4 बजे उसका इलाज कराया गया। फिलहाल उसकी स्थिति सामान्य बताई जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है। डिजिटल साक्ष्यों सहित अन्य प्रमाणों को भी खंगाला जा रहा है, ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके और न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
यह मामला न केवल प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े करता है, बल्कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा और विश्वास के मुद्दे को भी एक बार फिर केंद्र में लाता है।






