भोपाल: कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक बयान देने वाले मंत्री विजय शाह के इस्तीफे पर गुरुवार को भी स्थिति साफ नहीं हो सकी। इस बीच, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय संगठन ने उनके राजनीतिक भविष्य पर विचार-विमर्श किया। दिल्ली में हुई बैठक के बाद संगठन प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह भोपाल पहुंचे और मुख्यमंत्री निवास पर सीएम डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और खुद महेंद्र सिंह के बीच एक अहम बैठक हुई। चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया कि पार्टी का पूरा ध्यान फिलहाल इस्तीफे पर नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया और अदालती फैसलों पर रहेगा।
प्रभार वाले जिले भी जा सकते हैं हाथ से
विवादित बयान के चलते मंत्री शाह की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग के बीच रतलाम व झाबुआ जिलों का प्रभार उनसे छीना जा सकता है। वर्तमान में चल रही तबादला प्रक्रिया 30 मई तक जारी रहेगी, और इन जिलों में तबादलों की जिम्मेदारी प्रभारी मंत्री के पास होती है। लेकिन मंत्री शाह के सामने न आने से शासकीय सेवकों के आवेदन लंबित हैं, जिस वजह से कर्मचारियों ने दोनों जिलों के प्रभारी को बदलने की मांग की है।
आज राज्यपाल से मिलेंगे कांग्रेस विधायक
राज्यभर में कांग्रेस ने मंत्री शाह के विरोध में प्रदर्शन किए। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि भारत-पाक तनाव के दौरान पूरा देश सेना के साथ खड़ा था, और ऐसे समय में भाजपा के मंत्री द्वारा सेना का अपमान चौंकाने वाला है। उन्होंने शाह को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की। वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को राज्यपाल से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग करेगा। कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में कैविएट याचिका दायर की है, ताकि बिना उनकी बात सुने कोर्ट कोई आदेश न दे।
दलित-पिछड़ा संगठन ने शाह का समर्थन किया
अखिल भारतवर्षीय महासभा के राष्ट्रीय महासचिव दामोदर सिंह यादव ने विजय शाह का समर्थन करते हुए कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई आदिवासी समुदाय के साथ भेदभाव होगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अन्य नेताओं के विवादास्पद बयान सहन किए जाते हैं, तो सिर्फ शाह को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है?
उमा भारती की तीखी प्रतिक्रिया
पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने विजय शाह के मामले में पार्टी की चुप्पी पर सवाल उठाए और कहा कि मेरे भाई जैसे मंत्री के असभ्य बयान से हम सब शर्मिंदा हैं। या तो उन्हें बर्खास्त किया जाए या वे स्वयं इस्तीफा दें। इस मुद्दे पर पार्टी की उलझन समझ से परे है।
पार्टी में भी मतभेद
सूत्रों के अनुसार, विजय शाह के इस्तीफे को लेकर पार्टी में दो गुट बन गए हैं। एक गुट तत्काल इस्तीफे की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा डैमेज कंट्रोल में लगा है। मंत्री के बयान से पार्टी की छवि को गहरी चोट पहुंची है। शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर हुई क्षति की भरपाई केवल ठोस कार्रवाई से संभव है।
पुलिस की भूमिका और कानूनी पहलू
पूर्व आईपीएस अधिकारी आरएसएल यादव ने कहा कि मंत्री पर धारा 152 के तहत केस दर्ज हुआ है, जो देश की अखंडता और शांति को खतरे में डालने जैसा गंभीर अपराध है। पुलिस किसी भी समय, चालान से पहले, गिरफ्तारी कर सकती है। अब यह पुलिस के विवेक पर है कि वह कब और क्या कार्रवाई करती है।






