कांग्रेस का विकल्प बन रही है “आम आदमी पार्टी”

पंजाब के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की आशातीत सफलता बहुत कुछ बयां कर रही है।दिल्ली के बाहर केजरीवाल माँडल की स्वीकार्यता सभी दलों के लिए खतरे की घंटी है।मैं जानता हूँ भारतीय जनता पार्टी इस चुनौती पर गंभीर मंथन करेगी और एक जागरूक दल को करनी भी चाहिए मगर कांग्रेस में ये न होगा।हार की आदि हो चुकी कांग्रेस में थिंकटैंक है हीं नहीं।चरणवंदना करनेवाले नेताओं का पूर्ण विश्वास गांधी परिवार में है और मुखर नेताओं को भाजपा का एजेंट समझा जाता है।कार्यसमिति की बैठक बेमानी सी हो गई है क्योंकि उसमें हार का जिक्र तक नहीं होता।खैर मृतप्राय हो चुकी कांग्रेस से अब किसी को उम्मीद भी नहीं बची है।
राष्ट्रीय फलक पर आम आदमी पार्टी की स्वीकार्यता ये सिद्ध कर रही है कि लोगों ने कांग्रेस के विकल्प के रूप में आप की तरफ देखना शुरू कर दिया है।जनता देश में सशक्त विपक्ष चाहती है और अरविंद केजरीवाल के रूप में उन्हें ईमानदार चेहरा दिख रहा है जो मोदी जैसे महारथी से आँख में आँख डालकर बात कर सके।देश को “केजरीवाल माँडल” राजनीति की बेहद जरूरत है।सशक्त विपक्ष रहने से कोई भी शासक मनमानी नहीं कर पाता।किसान आंदोलन नरेंद्र मोदी के दिमाग का फितूर था जिसे मजबूत विपक्ष के रहते तत्काल रोका जा सकता था मगर ये काम देश के किसानों ने किया।
आम आदमी पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव में 92 सीटों पर सफलता हासिल की है जो अभूतपूर्व है।अपने दूसरे सार्थक प्रयास में हीं इतनी बडी सफलता प्रशंसनीय है।ये केजरीवाल माँडल की जीत है जिसने दिल्ली में दिखा दिया है कि सरकारी स्कूलों में पढाई देश के टाँप प्राइवेट स्कूलों से भी अच्छी होती है।अस्पतालों में मरीजों का मुफ्त इलाज,भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन ये दिखाता है कि इमारत कितनी बुलंद है।
“आप” ने पंजाब फतह को एक मिशन के रूप में लिया।जीत की रणनीति बनाने की जिम्मेदारी संदीप पाठक को सौंपी गई जो आईआईटी से पढे हैं और लंदन रिटर्न हैं।संदीप कभी प्रशांत किशोर के कोर ग्रुप के अहम सदस्य रह चुके हैं।संदीप ने पाँच लडकों की एक टीम बनाई जो पूरी तरह गैर राजनीतिक थे।पूरे पंजाब को पाँच जोन में बांटा गया और पाँचों नवयुवक पाँचों क्षेत्र के इंचार्ज बने।इन सभी को ये जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि वे कैंडिडेट का नाम तय करें,जिनके ऊपर कोई आरोप न हो।क्षेत्र के वे मुद्दे जो अभी तक हल न हो सकें हो उसे बताएं।
उम्मीदवार तय होने के बाद मुख्यमंत्री के चयन के लिए गुपचुप तरीके से रेफरेंडम कराया गया,जिसमें भगवंत मान का नाम सबसे आगे आया।चुनाव के एक महीना पहले मुख्यमंत्री के कंडीडेट(भगवंत मान) की घोषणा कर दी गई।पूरे कवायद में एक नाम जो अंडर करंट के रूप में काम कर रहा था वो राघव चड्ढा थे।उन्हें हीं पूरे आँपरेशन का नेतृत्व दिया गया और वे हीं अरविंद केजरीवाल को पल पल की रिपोर्ट दे रहे थे।
आम आदमी पार्टी के घोषणापत्र में शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार पर विशेष बल दिया गया जैसा दिल्ली में है।घोषणापत्र में तीन सौ यूनिट बिजली मुफ्त और 18 साल के ऊपर की औरतों को हजार रुपए महीना देने जैसे वायदे किये गए,जो कारगर साबित हुए।
आम आदमी पार्टी का पूरा फोकस पंजाब के मालवा क्षेत्र पर था क्योंकि ये क्षेत्र पंजाब का सबसे बडा क्षेत्र है।प्रदेश विधान सभा की 117 सीटों में 69 सीटें इसी क्षेत्र में पड़ती हैं।किसान आंदोलन का ये प्रमुख केंद्र बना था।गौरतलब है कि आप ने 2017 के विधानसभा चुनाव में कुल 20 सीटें जीती थी जिसमें से 18 मालवा क्षेत्र की थी।इस बार भी इस क्षेत्र से भारी सफलता मिली।
पंजाब में आप की सफलता भगवंत मान से जुडी हुई है क्योंकि केजरीवाल ने भगवंत के ऊपर पूरा विश्वास जताया है।भगवंत मान को एक अच्छी छवि बनानी होगी।देश भर में उनकी छवि एक शराबी की है यद्यपि 20 जनवरी,2019 को भगवंत मान ने बरनाला मे एक पार्टी रैली के दौरान अपनी माँ की उपस्थिति में घोषणा की थी कि उन्होंने 01 जनवरी 2019 से शराब को नहीं छूने की शपथ ली है।
योगेंद्र यादव ने 2015 में अपने साथी और सांसद भगवंत मान पर आरोप लगाया था कि वे मीटिंग में शराब पी कर आए थे।कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कई बार उन्हें शराबी कहा है।प्रधानमंत्री ने संसद में उनके पियक्कड़पन पर कटाक्ष किया था,जब वे प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान शोर मचा रहे थे।
सभी को याद होगा जब आप के बागी नेता हरिंदर सिंह खालसा ने तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से अपनी सीट बदलने की लिखित अपील की क्योंकि उन्हें भगवंत मान से शराब की गंध आ रही थी।भगवंत पर गायक मनमीत अलीशेर के अंतिम संस्कार में शराब पीकर आने के आरोप लगे थे।
उम्मीद है भगवंत मान अपनी छवि को तरासेगें और एक सर्वमान्य नेता बनकर पंजाब की सेवा करेंगे।उनके सामने पंजाब में फैले ड्रग्स रैकेट को तोड़ने की चुनौती होगी तो भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का अहम काम होगा।पंजाब की अर्थव्यवस्था बेहद जर्जर है और मुख्यमंत्री के सामने तीन हजार लाख करोड रूपये का खर्च है।भगवंत मान कहते हैं कि वो भ्रष्टाचार और रेत माफिया पर अंकुश लगाकर जरूरत के फंड जुटा लेंगे।सभी की शुभकामनाएं केजरीवाल एंड कंपनी के साथ है और मुझे पूरी उम्मीद है कि वे अपने मिशन में कामयाब होंगे।

अजय श्रीवास्तव 

विशिखा मीडिया

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