सिद्धिपीठ चूड़ामणि देवी मंदिर, जहाँ चोरी करने से पूरी होती हैं मनोकामनाएं

भारत की देव भूमि कहे जाने वाले राज्य उत्तराखंड की महिमा और वातावरण से तो हम सभी भली-भांति परिचित हैं। इसी पावन देवभूमि उत्तराखंड में रुड़की के चुड़ियाला गांव में देवी का एक अद्भुत मंदिर है, जहाँ चोरी करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। चूड़ामणि देवी मंदिर में नवरात्र के समय पर श्रद्धालुओं की दूर-दूर से भीड़ आती है तथा प्रसाद चढ़ाकर लोग यहाँ मन्नतें मांगते हैं। सुनने में काफ़ी अटपटा लगता है कि भला चोरी करने से कोई मनोकामना कैसे पूरी हो सकती है। लेकिन यहाँ पर मान्यता है कि अगर आप चोरी करते हैं तो आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

आपको बता दें कि इस प्राचीन सिद्धपीठ चूड़ामणि देवी मंदिर में नवरात्रि के समय श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है। देश के कोने-कोने से लोग माता के दर्शन के लिए आते हैं। क्षेत्रीय लोगों के अलावा अन्य स्थानों से भी श्रद्धालु माता के मंदिर में आस्था से उनका पसंदीदा प्रसाद- हलवा, पूरी, चने और बताशा का भोग चढ़ाकर माता को प्रसन्न कर उनसे मनोकामना मांगते हैं।

चूड़ामणि देवी मंदिर से जुडी मान्यताएं

  • माना जाता है की पुत्र की प्राप्ति के लिए अनेकों दंपति यहाँ आते हैं।
  • पुत्र प्रप्ति की इच्छा रखने वाले दंपति मंदिर में आकर माता के चरणों से लकड़ी का गुड्डा (लोकड़ा) चोरी करके अपने साथ ले जाते हैं और पुत्र प्राप्ति के बाद अषाढ़ माह में अपने पुत्र के साथ ढोल बाजों के साथ माता रानी के दरबार मे पहुंचते हैं।
  • दम्पति ले गए हुए लोकड़े के साथ ही एक अन्य लोकड़ा भी अपने पुत्र के हाथों से चढ़वाते हैं, तथा सदियों से चली आ रही प्रथा का पालन करते है। चुड़ियाला गांव की बहु- बेटियां भी विवाह के पश्चात पुत्र प्राप्ति के बाद लोकड़ा चढ़ती है।

एक अन्य मान्यता यह भी है कि यहां के बारे में ऐसा बताया जाता है कि दरअसल ब्रह्मा जी के पुत्र प्रजापति दक्ष ने यज्ञ आयोजित करवाया। उस यज्ञ में प्रजापति दक्ष ने भगवान शिव को आमंत्रण नहीं दिया। वही उन्होंने उसी स्थल पर भगवान शिव का घोर अपमान किया। तभी माता सती अपमान से क्षुब्ध होकर यज्ञ में कूदकर उसको विध्वंस कर दिया।

कहा जाता है कि किसी भी शुभ कार्य में त्रिदेव जरूर होने चाहिए अन्यथा वो कार्य कभी सिद्ध नहीं होता। इस घटना के बाद जब महादेव माता सती के आत्मदाह के पश्चात उनके मृत शरीर को ले जा रहे थे। उसी समय विष्णु जी ने अपने चक्र से सती माता के शरीर को कई भागों में विभाजित कर दिया। उसके बाद उनके सभी अंग पिंडों के रूप में पृथ्वी पर आज भी पूजे जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस स्थान पर माता का चूड़ा गिरा था।

चूड़ामणि देवी मंदिर निर्माण की कथा

गांव के स्थानीय लोगो का कहना है कि एक बार लंढौरा रियासत के राजा जंगल में शिकार करने आए थे। तभी जंगल में भ्रमण करते हुए उन्हें माता की पिंडी के दर्शन हुए। राजा पुत्ररत्न से वंचित थे। राजा ने माता से पुत्र प्राप्ति की मन्नत मांगी। जब राजा को पुत्र रत्न प्राप्त हुआ तो सन् 1805 में राजा ने मंदिर का भव्य निर्माण कराया। देवी के दर्शन के लिए उपस्थित हुई रानी ने माता शक्ति कुंड की सीढ़ियां बनवाई।

शेर भी आते माथा टेकने

वर्तमान में जिस क्षेत्र में माता का भव्य मंदिर स्थापित है वह प्राचीन समय में घना जंगल हुआ करता था। जहाँ शेरों की दहाड़ की आवाज आती थी। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि माता की पिंडी पर रोजाना शेर भी माथा टेकने के लिए आते थे।

बाबा बनखंडी का धाम

माता चूड़ामणि के अनन्य भक्त बाबा बनखंडी का भी मंदिर के प्रांगण में ही समाधि स्थल है। ऐसा भी बताया जाता है बाबा बनखंडी माता के बहुत बड़े भक्त और एक सिद्ध संत हुए। माता की पूजा सेवा में इन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। वहीं अंत में सन् 1909 में इन्होंने माता की भक्ति में लीन होते हुए समाधि ले ली। वही इस मंदिर के आसपास के जो स्थान है वो बहुत ही शांत और मनमोहक हैं। यहां आपको चिड़ियों का चहचहाना स्पष्ट रूप से सुनाई देता है। इसके अलावा यहां के जो जंगल है वहां भी आपको कई जंगली जानवर और सुंदर पक्षी देखने को मिलेंगे। यहां का मनोरम दृश्य मन को मोह लेने वाला है। माता के दर्शन कर जो भक्त अपनी इच्छा पूर्ति के लिए यहां आते हैं वो यहां के शांतिपूर्ण वातावरण और मनोरम दृश्यों का भी लाभ उठाते हैं।

51 शक्तिपीठों में एक है चूड़ामणि देवी मंदिर

कई प्रचलित कथाओं और ग्रंथों के अनुसार, चूड़ामणि मंदिर देवी सती के 51 शक्तिपीठों में से एक है। वहीं इस शक्तिपीठ की एक अलग ही गाथा है जो यहां की दिव्यता का प्रमाण देती है। ग्रंथों में भी इस शक्तिपीठ का भी वर्णन आता है।

कैसे पहुंचे चूड़ामणि देवी मंदिर

रुड़की से 19 किलोमीटर दूर भगवानपुर के चुडिय़ाला गांव में स्थित इस मंदिर मे पहुंचने के लिए रुड़की बस अड्डे से भगवानपुर आना पड़ेगा। इसके अलावा रेल मार्ग भी यहां पर पहुंचा जा सकता है। जब आप रेल मार्ग के द्वारा रुड़की, हरिद्वार और देहरादून जाते हैं, तो रुड़की स्टेशन के पास ही चुड़ियाला स्टेशन भी पड़ता है। माना जाता है कि अंग्रेजी शासन काल में चुड़ियाला रेलवे स्टेशन बनाया गया था, जिसके पीछे के महत्व पूर्ण कारण यह शक्तिपीठ थी। ये चूड़ामणि देवी मंदिर निश्चित ही एक दैवीय दिव्यता का उदाहरण है। जाहिर है कि एकलौती ऐसी जगह है जहां चोरी करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। यही कारण है कि देश- दुनियाभर से लोग मां चूड़ामणि के दर्शन करने यहां आते हैं। यही नहीं मनोकामना पूरी होने के पश्चात भी लोग यहां दर्शन करने के लिए आते हैं।

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