कांग्रेस पार्टी में कार्यकर्ताओँ और नेताओं की आंखों में सपने भरने वाले नेतृत्व की कमी के चलते हर रोज कोई न कोई महत्वपूर्ण नेता पार्टी छोड़ रहा है. इन 6 पॉ़इंट्स पर कांग्रेस को जरूर गौर करना चाहिए. 24 घंटे के अंदर कांग्रेस के 3 कद्दावर लोगों ने पार्टी छोड़ दी है. बॉक्सर विजेंदर सिंह, पूर्व सांसद संजय निरूपम और प्रवक्ता गौरव वल्लभ का पार्टी छोड़ना पार्टी के लिए बहुत बड़ा सेटबैक है. ऐन चुनाव के मौके पर इन नेताओं का पार्टी से मुंह मोड़ना पार्टी के नेतृत्व की कमजोरियों को उजागर करता है. गौरव वल्लभ और संजय निरूपम दोनों ने पार्टी के उन अंतर्विरोधों की चर्चा की है जिसके चलते उन्हें पार्टी छोड़नी पड़ी . हालांकि दोनों ने कोई नई बात नहीं बताई है. कांग्रेस से जाने वाले कई सालों से वही बात दुहरा रहे हैं पर कोई एक्शन होता नहीं दिखता है. अब तो सोशल मीडिया में लोग यह भी कहने लगे हैं कि इस तरह तो कांग्रेस में केवल गांधी परिवार ही बचेगा.
पार्टी में गांधी परिवार के अलावा किसी की नहीं चलती है. अगर आप गांधी परिवार के गुड बुक में जगह बनाने में असफल हैं तो आपकी तरक्की कांग्रेस में संभव नहीं है. उससे भी बड़ी बात यह है कि अगर गांधी परिवार का विश्वासपात्र बनकर आप अध्यक्ष भी बन जाते हैं तो भी आपकी इज्जत कौड़ी के ही मोल है. गांधी परिवार में 5 पावर सेंटर हैं. जिसमें 3 गांधी फैमिली के ही हैं. सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी. 2 पावर सेंटर गांधी परिवार के बाहर के हैं. जिसमें मल्लिकार्जुन खरगे और केसी वेणुगोपाल का उन्होंने नाम लिया है. राहुल और प्रियंका की लॉबी के चलते कई अच्छे नेताओं का सत्यानाश होते जनता ने देखा है. पंजाब में अमरिंदर सिंह, नवजोत सिद्धू और चरणजीत सिंह चन्नी की कहानी सबको याद ही है.यही हाल राजस्थान में भी हुआ. अशोक गहलोत और सचिन पायलट के झगड़ों का अंत न होना पार्टी के कई पावर सेंटर का ही नतीजा था. गांधी परिवार से अलग वाले पावर सेंटर तो सिर्फ मुगालते में रहते हैं. जब भ्रम टूटता है तो पार्टी छोड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता है.
कांग्रेस पार्टी में राहुल गांधी चाहे कितनी बार भी फेल हो जाएं नेतृत्व उनके पास ही रहेगा. ऐसा नहीं है कि पार्टी में नेताओं की कमी है. अगर गांधी परिवार के अंदर के लोगों को ही आगे बढ़ाना हो तो भी कई लोग हैं. प्रियंका गांधी को आगे बढ़ाने के नाम पर पार्टी को सांप सूंघ जाता है. लगातार राहुल की असफलता को देखते हुए प्रियंका को सामने लाया जा सकता है. कम से कम कुछ दिन के लिए एक उम्मीद तो जगती. वरुण गांधी तो बीजेपी में रहते हुए नरेंद्र मोदी को टार्गेट करते रहे इसी उम्मीद में कि कांग्रेस उन्हें जरूर जगह देगी. पर ऐसा संभव नहीं हुआ. इन नेताओं को जीतते देखकर कार्यकर्ताओं में पार्टी को लेकर एक उम्मीद जगती. पार्टी कार्यकर्ताओं के सपनों का मर जाना सबसे खतरनाक है. राहुल गांधी पर यह शुरू से ही आरोप रहा है कि जब पार्टी की जरूरत होती है तो वो गायब हो जाते हैं. जब पार्टी किसी विशेष अभियान की तैयारी कर रही होती है तो राहुल विदेश यात्रा पर होते हैं. राहुल ने पिछले दिनों भारत जोड़ो यात्रा और भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान खूब मेहनत की. जाहिर है कि उनकी मेहनत का परिणाम भी देखने को मिला. प्रियंका गांधी एक हफ्ते दिखाई देंगी फिर एक गायब हो जाएंगी. भारत जोड़ो न्याय यात्रा के समापन के बाद राहुल गांधी लगातार कई दिन तक नहीं दिखे. अमेठी के एक कांग्रेसी नेता ने एक बार बताया था कि उन्हें प्रियंका से फोन पर बात करने के लिए समय लेने में कई महीने लग गए. ऐसी स्थिति में कार्यकर्ता हो या नेता उसका बिदकना स्वभाविक होता है. पार्टी विचारधारा के नाम पर बुरी तरह कन्फ्यूज है. गुरुवार को पार्टी छोड़ने वाले गौरव वल्लभ कहते हैं कि एक ओर हम जाति आधारित जनगणना की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर संपूर्ण हिंदू समाज के विरोधी नजर आ रहे हैं. यह कांग्रेस के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है.
2014 के चुनावों में हार के बाद कांग्रेस ने हार के कारणों की समीक्षा के लिए एके एंटनी के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई थी. एंटनी कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि कांग्रेस की छवि एंटी हिंदू की होती जा रही है. पहले ऐसा नहीं था. इसमें सुधार की जरूरत है. पर सुधार के लिए कोई काम नहीं हुआ. राम मंदिर उद्घाटन से दूर रहना पार्टी की बड़ी भूल थी. इधर जितने भी लोगों ने कांग्रेस छोड़ी है उन सभी का कहना था कि राम मंदिर का विरोध करते रहना उनके लिए संभव नहीं हो सकता. आज गौरव वल्लभ और संजय निरूपम ने भी यही बात कही. पार्टी न हिंदुओं ही नहीं मुसलमानों को भी नहीं संभाल पा रही है. सीएए के नाम पर जिस तरह दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विरोध किया है उस तरह कांग्रेस नहीं कर सकी है. केरल में राहुल गांधी के खिलाफ सीएम विजयन ने इसे मुद्दा ही बना दिया है. गौरव वल्लभ ने अपने त्याग पत्र में लिखा, पार्टी के बड़े नेताओं का जमीनी कार्यकर्ताओं से कटे होने के चलते यू ट्यूबर्स की मौज हो गई है. तमाम बड़े नाम वाले पत्रकार दिन भर इस तरह की बातें करते है जो हकीकत में होती नहीं हैं. केवल कांग्रेस को फील गुड देने वाली हेडलाइंस से पार्टी नेतृत्व मगन रहता है.






