राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में सत्ता संभालने वाले हेमंत सोरेन सोमवार को विधानसभा में विश्वास मत पेश किया। विपक्ष के जोरदार हंगामे और वॉकआउट के बीच सीएम सोरेन ने विश्वास मत जीत लिया।बता दें, झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो ने विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए एक घंटे का समय आवंटित किया था। 81 सदस्यीय विधानसभा में कुल 45 विधायकों ने विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। वहीं, निर्दलीय विधायक सरयू राय ने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के विधायक वोटिंग के लिए गिनती शुरू होते ही सदन से बाहर चले गए। भाजपा के नेतृत्व वाले विपक्ष में भाजपा के 24 और आजसू पार्टी के तीन विधायक हैं।
इस बीच, रांची विधानसभा के बाहर भाजपा विधायकों ने राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इससे पहले, भाजपा सदस्य विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो से विधायक भानु प्रताप साही को बोलने की अनुमति देने की मांग को लेकर आसन के समीप आ गए थे। हालांकि, महतो ने उनकी मांग अस्वीकार कर दी। विश्वास प्रस्ताव पर मतदान के दौरान 75 विधायक सदन में मौजूद थे। निर्दलीय सदस्य सरयू राय ने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया। झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) शामिल हैं, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के एकमात्र विधायक उसे बाहर से समर्थन दे रहे हैं।
28 जून को जेल से आए थे बाहर
कथित भूमि घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में झारखंड उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद हेमंत सोरेन को 28 जून को जेल से रिहा कर दिया गया था। 31 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार किए जाने से कुछ समय पहले उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। झारखंड में 81 सदस्यीय विधानसभा में वर्तमान में 76 विधायक हैं। हेमंत सोरेन ने तीन जुलाई को सरकार बनाने का दावा पेश किया था, जिसके बाद सत्तारूढ़ झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन ने राज्यपाल को 44 विधायकों की समर्थन सूची सौंपी।





