फ्रंटलाइन गर्भवती महिला कर्मचारियों को हल्के या ऑफिस काम में ट्रांसफर करने के अनुरोध को रेलवे बोर्ड ने खारिज कर दिया है। रेलवे बोर्ड ने 25 जुलाई को एक पत्र में कहा है कि गर्भवती महिला लोको पायलटों की गर्भावस्था के दौरान उनके लिए अवकाश सुविधाओं का प्रावधान पहले से ही किया गया है। ड्यूटी के दौरान गर्भपात का सामना करने वाली महिला लोको पायलटों के एक समूह ने रेलवे बोर्ड के समक्ष अपनी समस्या हल करने के लिए रेलवे ट्रेड यूनियन से संपर्क किया था। ट्रेड यूनियन ने यह मामला रेलवे बोर्ड से 2 और 3 मई को हुई बैठक में उठाया था। फेडरेशन ने महिला लोको पायलटों और सहायक लोको पायलटों की ओर से गर्भावस्था के दौरान हल्की ड्यूटी पर तैनाती की मांग की थी। हालांकि, बोर्ड ने अपने अंतिम निर्णय में इस अनुरोध को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि रेलवे नियमों में पर्याप्त छुट्टियों का प्रावधान है।
मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम 2017 का दिया था हवाला
महिला कर्मचारियों ने रेलवे बोर्ड से अपील की थी कि गर्भावस्था के दौरान महिला फ्रंटलाइन कर्मियों को हल्की या स्थिर नौकरियों में स्थानांतरित करने के दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। उन्होंने रेलवे बोर्ड को पत्र लिखकर मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम 2017 का हवाला दिया था। पत्र में कहा गया था कि यह अधिनियम नियोक्ता को किसी भी गर्भवती महिला को मुश्किल कामों में शामिल करने से रोकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि मुश्किल काम करने से महिला कर्मचारी की गर्भावस्था में परेशानी हो सकती है।
मुश्किल होता है महिला लोको पायलट का काम
एक महिला लोको पायलट का कहना था कि रेलवे अधिनियम में लोको पायलट के काम को कठिन काम के रूप में अधिसूचित किया गया है। अधिनियम की धारा चार में साफ तौर पर बताया गया है कि महिला कर्मचारियों को कठिन काम करने के लिए नहीं कहा जा सकता। उन्होंने आगे बताया कि कठोर परिस्थितियों की वजह से उन्हें कई बार गर्भपात का सामना करना पड़ा। एक अन्य महिला लोको पायलट का कहना था कि इंजन कैब में प्रवेश करना ही अपने आप में एक मुश्किल काम है। ऐसा इसलिए क्योंकि इंजन कैब की सीढ़ी के हैंडल की ऊंचाई जमीन से लगभग छह फीट है। उन्होंने बताया कि रेलवे स्टेशनों पर इंजन कैब में चढ़ना और उतरना आसान है लेकिन रेलवे यार्ड या बाहर के इलाकों में यह काम बेहद मुश्किल है।






