केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। इसमें पैरासिटामोल, कैल्शियम, विटामिन डी, शुगर और ब्लड प्रेशर जैसी कई आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं को लेकर यह जानकारी दी गई है। इनमें से कई दवाएं क्वालिटी चेक में फेल हो गई हैं। ये दवाएं हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स लिमिटेड, हेटेरो ड्रग्स, कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड और अल्केम लेबोरेट्रीज जैसी बड़ी कंपनियों द्वारा बनाई जाती हैं।
सीडीएससीओ ने मिलावटी, गलत ब्रांडिंग वाली दवाओं, चिकित्सा उपकरणों, टीकों और सौंदर्य प्रसाधनों की सूची जारी की है। इसमें एमाइलेज, प्रोटीएज, ग्लूकोएमाइलेज, पेक्टिनेज, अल्फा गैलेक्टोसिडेज, लैक्टेज, बीटा-ग्लूकोनेज, सेल्युलेस, लाइपेज, ब्रोमेलैन, जाइलेनस, हेमिकेल्यूलेस, माल्ट डायस्टेज, इनवर्टेज और पापेन जैसे एंजाइम्स के इस्तेमाल से मानव स्वास्थ्य को खतरा होने की आशंका जताई गई है। बैन की गई दवाओं की सूची में पल्मोसिल (सिल्डेनाफिल इंजेक्शन), पैंटोसिड (पैंटोप्राजोल टैबलेट आईपी), उर्सोकोल 300 (अर्सोडियोक्सीकोलिक एसिड गोलियां भारतीय फार्माकोपिया) शामिल हैं। उर्सोकोल 300 दवा सन फार्मा द्वारा निर्मित है। इसके अलावा, टेल्मा एच (टेल्मिसार्टन 40 मिलीग्राम और हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड 12.5 मिलीग्राम टैबलेट आईपी) और डेफ्लाजाकोर्ट टैबलेट (डेफकोर्ट 6 टैबलेट) भी परीक्षण में फेल हो गई हैं।
राजस्थान में मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के तहत सप्लाई होने वाली 10 दवाइयों के सैंपल भी मई 2024 में फेल हो गए हैं। राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन ने 8 कंपनियों की 10 दवाइयों की सप्लाई पर रोक लगा दी है।
पैरासिटामोल, शुगर, ब्लड प्रेशर सहित 53 दवाएं क्वालिटी चेक में फेल





