लखनऊ में जेपीआईसी मामले में सरकार और समाजवादी पार्टी के बीच विवाद

लखनऊ के जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (जेपीआईसी) को लेकर एक बार फिर विवाद उभर कर सामने आया है। जय प्रकाश नारायण की जयंती से पहले, आधी रात को योगी आदित्यनाथ की सरकार ने जेपीआईसी को सील कर दिया। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव गुरुवार रात को जेपीआईसी पहुंचे। समाजवादी पार्टी का आरोप है कि सरकार इस परिसर को बेचना चाहती है। पिछले साल, अखिलेश यादव ने यहां के ऊंचे गेट को लांघते हुए जेपी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया था।
योगी सरकार के इस कदम के खिलाफ समाजवादी पार्टी ने विरोध शुरू कर दिया है। इसके साथ ही, सरकार ने सपा प्रमुख के घर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस तैनात कर दी है। अखिलेश यादव ने सरकार पर जेपीआईसी को बेचने की कोशिश करने का आरोप लगाया और सवाल किया कि सरकार आखिर क्या छुपाने की कोशिश कर रही है। योगी सरकार ने पिछले साल भी उन्हें वहां जाने से रोकने की कोशिश की थी, लेकिन अखिलेश यादव ने गेट लांघ कर परिसर में प्रवेश किया और वहां जय प्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
असल में, जेपीआईसी अखिलेश यादव की सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट था, जिसे दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर की तरह बनाने की योजना थी। इसका निर्माण 2013 में सपा सरकार के तहत शुरू हुआ था और 2016 तक इस परियोजना पर 813 करोड़ रुपये खर्च हो चुके थे। मुख्यमंत्री रहते हुए अखिलेश यादव ने 11 अक्टूबर 2016 को इसके स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया था, जिसमें ऑल वेदर ओलंपिक साइज स्विमिंग पूल और मल्टीपर्पज कोर्ट जैसी सुविधाएं थीं। बाद में इसे बंद कर दिया गया। इस परिसर में जय प्रकाश नारायण की प्रतिमा भी लगी हुई है, जो संपूर्ण क्रांति के अग्रणी नेता थे। इस परिसर का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण 2017 तक पूरा हो चुका था, लेकिन योगी सरकार के आने के बाद काम रुक गया।
जेपीआईसी का निर्माण शालीमार नामक रियल एस्टेट कंपनी ने किया है, और यह 18 मंजिला इमारत है। इसमें पार्किंग, जय प्रकाश नारायण पर आधारित संग्रहालय, बैडमिंटन कोर्ट, लॉन टेनिस कोर्ट, 100 कमरों वाला अतिथिगृह और छत पर एक हेलीपैड बनाने की योजना थी।
समाजवादी पार्टी का कहना है कि सरकार इस परिसर को बेचने की तैयारी में है और इसकी ओर इशारा करते हुए अखिलेश यादव ने लिखा, “ये टीन शेड लगाकर सरकार कुछ छिपाना चाह रही है। कहीं ऐसा तो नहीं कि बेचने की योजना हो, या किसी को देने की सोच हो।”
बीजेपी सरकार आने के बाद जेपीआईसी की देखभाल में लापरवाही बरती गई और अब यह परिसर खंडहर में बदल चुका है। जगह-जगह घास उग आई है और इमारतों को नुकसान पहुंचा है। योगी सरकार ने इस परियोजना में गड़बड़ी की जांच के आदेश दिए हैं, जो लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा की जा रही है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, “श्रद्धांजलि देने से रोकना सभ्य लोगों की निशानी नहीं है!” और दूसरी पोस्ट में लिखा, “ये है भाजपा राज में आज़ादी का दिखावटी अमृतकाल। श्रद्धांजलि न दे पाने के कारण दीवारें उठा दी गईं। भाजपा ने जो रास्ता बंद किया है, वो उनकी बंद सोच का प्रतीक है। भाजपा जय प्रकाश नारायण जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के लिए अपने मन में दुर्भावना रखती है, जिन्होंने देश की आजादी में योगदान दिया था।”

विशिखा मीडिया

विशिखा ने जनवरी 2019 से राजस्थान की राजधानी जयपुर से हिंदी मासिक पत्रिका के रूप में अपनी नींव रखी। राजस्थान में सफलता का परचम फहराने के बाद विशिखा प्रबंधन ने अप्रैल 2021 से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मासिक पत्रिका के रूप में अपना प्रकाशन आरम्भ करने का निर्णय लिया। इसी बीच लोगों की प्रतिक्रियाएं आईं कि विशिखा का प्रकाशन दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी होना चाहिये। पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए विशिखा प्रबंधन ने 1 जनवरी 2022 से जयपुर से दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी अपना प्रकाशन आरम्भ किया। विशिखा में प्रमुख रूप से राजनैतिक गतिविधियों सहित, कला, समाज, पर्यटन, एवं अन्य विषयों से संबंधित विस्तृत आलेख प्रकाशित होते हैं। विशिखा पत्रिका ने अपने विस्तृत आलेखों और दैनिक न्यूज़ विश्लेषण के माध्यम से अपने पाठकों को जानकारी और ज्ञान की दुनिया में ले जाने का महत्वपूर्ण काम किया है। अपनी सटीक खबरों, विस्तृत रिपोर्टों और विशेष विषयों पर आधारित लेखों के साथ, विशिखा ने लगातार अपनी विश्वसनीयता बनायी हुई है। विशिखा मासिक पत्रिका की खबरों की गुणवत्ता, नवीनता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए इस पत्रिका ने अपने पाठकों का दिल जीता है। यह पत्रिका न केवल जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि लोगों के बीच अपने विचारों के आदान प्रदान के लिए एक मंच भी उपलब्ध करती है। इसके लेखक, संपादक और टीम का प्रयास निरंतर यह होता है कि पाठकों को एक अच्छा अनुभव देने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ-साथ समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करें। विशिखा का लक्ष्य आपको विभिन्न विषयों पर अद्भुत लेखों से परिचित कराना है। पत्रिका के माध्यम से हम लेखकों, संगठनों, एवं समाज के प्रतिष्ठित और सामान्य लोगों को उनकी रचनात्मक योग्यताओं के आधार पर साझा करने का प्रयास करना है। पत्रिका टीम का मूल मंत्र है- रचनात्मकता, नैतिकता और उच्चतम गुणवत्ता। विशिखा हिंदी मासिक पत्रिका है जो 2019 में शुरू हुई थी। वर्तमान में यह राजस्थान और उत्तराखंड से प्रकाशित की जाती है। इसमें विभिन्न विषयों पर लेख शामिल होते हैं जैसे कि करंट अफेयर्स, साहित्य, महिलाएं, यात्रा और अधिक। हमारी पत्रिका उन लोगों के लिए है जो ज्ञान और सूचना की तलाश में होते हैं और उन्हें उन विषयों से रुबरु कराने का एक मंच प्रदान करती हैं।

Leave a Reply

Discover more from

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading