
इज़रायल की नज़र ईरान के यूरेनियम भंडार पर
ईरान-अमेरिका-इज़रायल के बीच जारी संघर्ष का आज 32वां दिन है और हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। युद्ध थमने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ परोक्ष रूप से बातचीत जारी है, लेकिन इसके बावजूद दोनों पक्षों के बीच हमले जारी हैं। ट्रंप ने ईरान के खार्ग द्वीप को निशाना बनाने, उसके तेल संसाधनों पर कब्जा करने और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को नष्ट करने की चेतावनी भी दी है। हालांकि, उन्होंने जल्द ही इस संघर्ष को समाप्त करने की इच्छा भी जताई है। वहीं, इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के खिलाफ अभियान फिलहाल नहीं रुकेगा। एक साक्षात्कार में नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ अभियान आधे से अधिक पूरा हो चुका है, लेकिन अभी इसे रोकने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने बताया कि इज़रायल का मुख्य फोकस ईरान के यूरेनियम भंडार पर है। परमाणु हथियारों के निर्माण में यूरेनियम की अहम भूमिका होती है, इसलिए इज़रायल चाहता है कि ईरान के यूरेनियम भंडार को हटाकर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को सौंप दिया जाए। नेतन्याहू के अनुसार, इस मुद्दे पर ट्रंप का भी यही रुख है।
सैन्य और परमाणु क्षमता पर प्रहार
नेतन्याहू ने कहा कि ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को निष्क्रिय करना बेहद जरूरी है। इसके लिए इज़रायली सेना लगातार कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि सेना ईरान के सैन्य ठिकानों, परमाणु ढांचे और औद्योगिक सुविधाओं को कमजोर करने के मिशन को तेजी से आगे बढ़ा रही है और इसमें उसे सफलता भी मिल रही है। नेतन्याहू के मुताबिक, इज़रायल पहले ही ईरान की मिसाइल क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर चुका है, कई उत्पादन इकाइयों को नष्ट किया जा चुका है और प्रमुख परमाणु वैज्ञानिकों को भी निशाना बनाया गया है। उनका दावा है कि इससे ईरान की महत्वाकांक्षाएं कई वर्षों पीछे चली गई हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस सैन्य अभियान का उद्देश्य केवल तत्काल खतरे को कम करना नहीं, बल्कि भविष्य में संभावित बड़े खतरे को भी टालना है।




