उत्तर प्रदेश में डीजीपी पद पर नियुक्ति के लिए नई नियमावली बनाई गई है, जिसे कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिल चुकी है। नए नियम के अनुसार, अब यूपी में डीजीपी की नियुक्ति राज्य सरकार के स्तर से ही की जाएगी। अब डीजीपी की नियुक्ति के लिए एक समिति गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता हाईकोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश करेंगे। इस समिति में मुख्य सचिव, संघ लोक सेवा आयोग और यूपी लोक सेवा आयोग के नामित सदस्य, अपर मुख्य सचिव गृह और एक रिटायर्ड डीजीपी भी शामिल होंगे। इस पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी है।
नियमावली के अनुसार, डीजीपी पद पर नियुक्ति के लिए ऐसे अधिकारी को चुना जाएगा जिनकी सेवा अवधि कम से कम छह महीने शेष हो और डीजीपी का न्यूनतम कार्यकाल दो वर्ष का होगा। अगर नियुक्ति के समय सेवा अवधि केवल छह महीने ही बची हो, तो कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है। यदि डीजीपी किसी आपराधिक मामले, भ्रष्टाचार या कर्तव्यपालन में अक्षम पाए जाते हैं, तो सरकार उन्हें कार्यकाल पूर्ण होने से पहले हटा सकती है, लेकिन हटाने के लिए हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन अनिवार्य होगा। केवल वही अधिकारी डीजीपी पद पर नियुक्त होंगे जो वेतन मैट्रिक्स के स्तर 16 में कार्यरत हों।
सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर 2006 को दिए गए प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में आदेश दिया था कि राज्य सरकारें नया पुलिस अधिनियम बनाए ताकि पुलिस व्यवस्था पर किसी तरह का दबाव न हो और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके। हाईकोर्ट ने भी उम्मीद जताई है कि नई नियमावली में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी नहीं की जाएगी। नियुक्ति नियमावली-2024 का उद्देश्य डीजीपी पद पर उपयुक्त व्यक्ति के चयन के लिए एक स्वतंत्र और पारदर्शी तंत्र स्थापित करना है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह चयन राजनीतिक या कार्यकारी हस्तक्षेप से मुक्त रहे।
उत्तर प्रदेश सरकार ने डीजीपी की नियुक्ति के नियमों में किया बड़ा फेरबदल






