सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें मदरसा अधिनियम को असंवैधानिक करार दिया गया था। इस फैसले से उत्तर प्रदेश के मदरसों में पढ़ रहे लाखों छात्रों और शिक्षकों को राहत मिली है, क्योंकि इसके कारण मदरसों की मान्यता और संचालन पर सवाल उठ खड़े हुए थे। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मदरसा अधिनियम को संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन मानते हुए असंवैधानिक ठहराया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब मदरसों का संचालन पूर्व की तरह जारी रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला, और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए मदरसा अधिनियम को संवैधानिक करार दिया है। पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट का निर्णय उचित नहीं था और मदरसा अधिनियम भारतीय संविधान के अनुरूप है। इस फैसले के तहत उत्तर प्रदेश के मदरसों में शिक्षा देने की प्रक्रिया जारी रहेगी, और इनकी मान्यता भी सुरक्षित रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि मदरसा अधिनियम संविधान के अनुरूप है और इससे मदरसों में पढ़ रहे छात्रों और शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है, साथ ही यह निर्णय मदरसा शिक्षा के संवैधानिक संरक्षण को भी मजबूत करता है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से उत्तर प्रदेश के करीब 16,513 मान्यता प्राप्त मदरसों को बड़ी राहत मिली है। अब ये मदरसे पूर्ववत् चलते रहेंगे और उनकी मान्यता पर कोई खतरा नहीं रहेगा। उत्तर प्रदेश में कुल लगभग 23,500 मदरसे हैं, जिनमें से 16,513 मदरसे पंजीकृत और मान्यता प्राप्त हैं। इनमें से 560 मदरसों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता (एडेड) मिलती है। इसके अतिरिक्त, लगभग 8,000 मदरसे गैर-मान्यता प्राप्त हैं जो बिना किसी सरकारी मान्यता के संचालित होते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला रद्द कर, मदरसा एक्ट को मान्यता दी



