सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश से जेट एयरवेज में फंस गए 1.43 लाख निवेशक

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जेट एयरवेज के शेयर 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए, जो बीएसई पर 34.04 रुपये पर बंद हुआ। 30 सितंबर तक, छोटे निवेशकों (जिनकी निवेशित पूंजी 2 लाख रुपये से कम है) के पास जेट में 19.29 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर 2024 को जेट एयरवेज की संपत्ति बेचने का आदेश दिया था। इससे पहले एनसीएलएटी ने जेट एयरवेज के मालिकाना हक को जालान-कालरॉक कंसोर्टियम (JKC) को देने का निर्णय लिया था, जिसके बाद एसबीआई और अन्य कर्जदाताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम निर्णय लेते हुए संपत्ति को बेचने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से लाखों छोटे निवेशकों पर मुसीबत आ गई है, क्योंकि उनके पैसे इस कंपनी के शेयरों में फंसे हुए हैं। गुरुवार को आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जेट एयरवेज के शेयर 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए, जो बीएसई पर 34.04 रुपये पर बंद हुआ। 30 सितंबर तक, छोटे निवेशकों के पास जेट में 19.29 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। अन्य बड़े निवेशकों में पंजाब नेशनल बैंक (26 प्रतिशत), एतिहाद एयरवेज (24 प्रतिशत), और पूर्ववर्ती प्रमोटर (25 प्रतिशत) शामिल हैं। कंपनी का मौजूदा मार्केट कैपिटलाइजेशन 386.69 करोड़ रुपये है, जिसमें से छोटे निवेशकों की हिस्सेदारी 74.6 करोड़ रुपये है।
एनसीएलएटी का निर्णय खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और अन्य कर्जदाताओं की अपील को स्वीकार किया। कोर्ट ने कहा कि जालान-कालरॉक कंसोर्टियम निर्धारित समय में पहली किश्त जमा करने में विफल रहा।
जेट एयरवेज का एक समय भारत की प्रमुख एयरलाइन के रूप में बड़ा नाम था, लेकिन 2010 के दशक के अंत तक इसे भारी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा। कर्ज बढ़ने, ऑपरेटिंग लागत में वृद्धि और कम लागत वाली एयरलाइंस के साथ प्रतिस्पर्धा के कारण, 2019 तक इसे बंद करना पड़ा। तब कंपनी पर 7,500 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो गया था।
इसके बाद एसबीआई और अन्य कर्जदाताओं ने इसे दिवालिया प्रक्रिया के तहत एनसीएलटी में ले जाने का फैसला किया। कलरॉक कैपिटल और मुरारी लाल जालान जैसे निवेशकों ने रुचि दिखाई और एक रिवाइवल प्लान पेश किया, जिसे 2021 में एनसीएलटी से मंजूरी मिली। हालांकि, यह प्लान भी सफल नहीं हो सका, और 2023 तक जेट एयरवेज के पुनरुद्धार की उम्मीदें धुंधली होने लगीं क्योंकि जालान-कालरॉक कंसोर्टियम वित्तीय दायित्वों को पूरा नहीं कर पाया। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने जेट एयरवेज की दिवालियापन की कहानी पर पूर्ण विराम लगा दिया है।

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