राजस्थान के नागौर जिले में टाइप-1 डायबिटीज के बच्चों की बढ़ रही है संख्या

नागौर. बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। नागौर जिले में पिछले तीन वर्षों में इस बीमारी की रफ्तार में बढ़ोतरी देखी गई है। राहत की बात यह है कि अब सरकार ने ऐसे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए नागौर को पायलट प्रोजेक्ट में शामिल किया है। इसके तहत प्रभावित बच्चों के इंसुलिन और अन्य खर्चों को सरकार वहन करेगी। जिलेभर में टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों का डेटा जुटाया जा रहा है। अब तक कुछ बच्चे सामने आए हैं, जो अपना इलाज जयपुर और दिल्ली में करवा रहे थे।
टाइप-1 डायबिटीज: कारण और प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार, टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों का शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता। यह समस्या शरीर में वायरल संक्रमण या अग्नाशय की गड़बड़ी के कारण होती है, जिससे इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है और ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने लगता है। गलत खानपान और जीवनशैली में असंतुलन भी इस बीमारी का खतरा बढ़ाते हैं।
आंकड़ों के अनुसार, 5 साल से कम उम्र के बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज हर साल 3-4% की दर से बढ़ रही है। यह न केवल शारीरिक विकास को प्रभावित करता है बल्कि शरीर के आंतरिक अंगों को भी नुकसान पहुंचाता है। आनुवंशिक कारणों से यह समस्या जन्म से ही हो सकती है। इसे देखते हुए सरकार ने इस बीमारी पर नियंत्रण के लिए जागरूकता और इलाज की कवायद तेज कर दी है।
शिशु रोग विशेषज्ञ ने बताया कि यह बीमारी बच्चों में अधिक देखी जाती है, और प्रभावित बच्चों को दिन में तीन-चार बार इंसुलिन लेना पड़ता है। बढ़ते मामलों को देखते हुए नागौर को पायलट प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है। यहां पुराने अस्पताल में “मधुहारी क्लीनिक” खोली गई है, जहां बच्चों का मुफ्त उपचार किया जाएगा। सरकार उनके इंसुलिन और अन्य खर्चों को उठाएगी। सूत्रों के अनुसार, इस बीमारी से पीड़ित बच्चों पर प्रति माह औसतन 4-5 हजार रुपए का खर्च आता है। कई बार आर्थिक तंगी के कारण बच्चे समय पर इलाज नहीं ले पाते, जिससे उनकी स्थिति गंभीर हो जाती है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों की जीवन गुणवत्ता सुधारना और इलाज को सुलभ बनाना है। नागौर जिले में सर्वे का काम जारी है, और क्लीनिक दिसंबर में शुरू होने की संभावना है।
चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर द्वारा इस प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया जाएगा। इसके लिए मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और अन्य अधिकारी अस्पताल का निरीक्षण कर सुविधाओं की जांच करेंगे। नागौर के साथ डेगाना और जायल में मधुहारी क्लिीनिक खुलेगा। चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर इसका जल्द शुभारंभ करेंगे। इस संबंध में पुराना अस्पताल स्थित क्लिीनिक का निरीक्षण कर व्याप्त खामियां दूर करने को कह दिया है।

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