कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रविवार को केंद्र सरकार द्वारा चुनाव नियमों में किए गए हालिया संशोधन की तीखी आलोचना की और इसे भारतीय चुनाव आयोग की ईमानदारी को कमजोर करने की साजिश बताया। एक्स पर पोस्ट करते हुए खड़गे ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को चुनाव आयोग चयन पैनल से हटाने जैसे कदमों की ओर इशारा किया और आरोप लगाया कि सरकार अब उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद महत्वपूर्ण चुनावी जानकारी छिपा रही है। खड़गे ने कहा, “चुनाव नियमों में मोदी सरकार का दुस्साहसिक संशोधन भारत के चुनाव आयोग की संस्थागत ईमानदारी को कमजोर करने की उसकी सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। पहले उन्होंने मुख्य न्यायाधीश को चयन पैनल से हटा दिया, और अब उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद चुनावी जानकारी छिपा रहे हैं।” गौरतलब है कि हाल ही में केंद्र सरकार ने चुनाव आयोग की सिफारिश पर नियम 93 (2) में संशोधन किया है, जिसके तहत सीसीटीवी फुटेज सहित कुछ इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों की सार्वजनिक जांच पर प्रतिबंध लगाया गया है। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने यह संशोधन करके स्पष्ट किया है कि कौन से दस्तावेज सार्वजनिक निरीक्षण के लिए उपलब्ध होंगे।
खड़गे ने कहा, “जब भी कांग्रेस ने चुनाव आयोग को मतदाता सूची से नाम हटाने और ईवीएम में पारदर्शिता की कमी जैसी चुनावी अनियमितताओं के बारे में लिखा, आयोग ने अपमानजनक लहजे में जवाब दिया और गंभीर शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया। यह दर्शाता है कि एक अर्ध-न्यायिक संस्था होने के बावजूद, चुनाव आयोग स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहा है। मोदी सरकार द्वारा चुनाव आयोग की ईमानदारी को कमजोर करना संविधान और लोकतंत्र पर सीधा हमला है। हम इसे बचाने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे।” यह मामला पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के हाल के आदेश से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने 1961 के चुनाव नियम के तहत हरियाणा विधानसभा चुनाव से संबंधित सीसीटीवी फुटेज सहित सभी दस्तावेज साझा करने का निर्देश दिया था।
चुनाव नियमों में संशोधन किये जाने पर खड़गे ने केंद्र सरकार की आलोचना की





