पहली बार तीनों सेनाओं ने निकाली संयुक्त झांकी; परेड में प्रलय मिसाइल भी देखने को मिलीं।
पूरे देश में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ रविवार को 76वां गणतंत्र दिवस मनाया। इस अवसर पर कर्तव्य पथ पर आयोजित समारोह में देश की सैन्य शक्ति, कला-संस्कृति, विविधता और सरकारी योजनाओं की सफलता की झलक देखने को मिली। इस बार की परेड में प्रलय मिसाइल और सेना के तीनों अंगों की झांकियां पहली बार शामिल की गईं।
कैप्टन डिंपल सिंह भाटी ने राष्ट्रपति को दी सलामी
कैप्टन डिंपल सिंह भाटी ने लड़ाकू दस्ते का नेतृत्व करते हुए चलती मोटरसाइकिल पर 12 फीट ऊंची सीढ़ी पर खड़े होकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सलामी दी। वे ऐसा करने वाली भारतीय सेना की पहली महिला अधिकारी बन गईं। उनका प्रदर्शन भारतीय सेना की सिग्नल कोर की बहादुरी, सटीकता और उत्कृष्टता को दर्शाता है, जिसे ‘‘डेयर डेविल्स’’ के नाम से जाना जाता है।
तीनों सेनाओं ने निकाली संयुक्त झांकी
कर्तव्य पथ पर परेड के दौरान भारत की ताकत का प्रदर्शन किया गया। सैनिकों के परेड दस्ते, मिसाइलें, टैंक और लड़ाकू विमान दर्शकों को रोमांचित कर गए। पहली बार तीनों सेनाओं ने तालमेल को दर्शाती हुई संयुक्त झांकी प्रस्तुत की। झांकी का विषय ‘सशक्त और सुरक्षित भारत’ था। इस दौरान अर्जुन टैंक, तेजस लड़ाकू विमान और उन्नत हल्के हेलीकॉप्टरों ने अपने प्रदर्शन से दर्शकों को प्रभावित किया। परेड में सतह से सतह पर मार करने वाली सामरिक मिसाइल प्रलय और युद्धक्षेत्र निगरानी प्रणाली ‘संजय’ का भी पहली बार प्रदर्शन किया गया।
पहली बार इंडोनेशिया की सैन्य टुकड़ी ने लिया हिस्सा
परेड में पहली बार इंडोनेशिया की सैन्य टुकड़ी और बैंड ने हिस्सा लिया। 352 सदस्यीय इस टुकड़ी में इंडोनेशियाई सेना, नौसेना और वायु सेना के कर्मी शामिल थे। उन्होंने ‘भिन्नेका तुंगगल इका’ (विविधता में एकता) की भावना का प्रतिनिधित्व किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम का विशेष प्रदर्शन
गणतंत्र दिवस पर 5000 से अधिक लोक और आदिवासी कलाकारों ने देश के विभिन्न हिस्सों की 45 नृत्य शैलियों का प्रदर्शन किया। पहली बार पूरे कर्तव्य पथ को कवर करते हुए कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं, जिससे सभी अतिथियों को इन नृत्यों का आनंद मिल सका।




