भोपाल में भिक्षावृत्ति पर रोक लगाने के लिए कलेक्टर ने प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए थे। इसके बावजूद, होटल, हॉकर्स कॉर्नर और धार्मिक स्थलों के बाहर भिखारी जमा हो गए थे। कलेक्टर ने भिक्षावृत्ति प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के लिए दलों का गठन किया है।
भोपाल: शहर में भिक्षावृत्ति पर रोक लगाने के उद्देश्य से सोमवार को कलेक्टर ने धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए थे। इसके बाद, शहर के प्रमुख चौराहों से भिखारी गायब हो गए, लेकिन उन्होंने आसपास के सार्वजनिक स्थलों को अपना ठिकाना बना लिया। दरअसल, आदेश लागू होने के अगले दिन मंगलवार को जब जागरण ने विभिन्न स्थानों का निरीक्षण किया, तो यह पाया गया कि चौराहों पर भिखारी नहीं थे, लेकिन होटल, हॉकर्स कॉर्नर और धार्मिक स्थलों के बाहर उन्होंने अपना डेरा जमा रखा था। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी कर भोपाल जिले की समस्त राजस्व सीमा में भिक्षावृत्ति को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया है।
नोडल अधिकारी नियुक्त
भिक्षावृत्ति प्रतिबंध को प्रभावी रूप से लागू करने, कार्रवाई सुनिश्चित करने और चिन्हित भिखारियों को आश्रय स्थल में स्थानांतरित करने के लिए कलेक्टर ने विशेष दलों का गठन किया है। इन दलों में सामाजिक न्याय विभाग के संयुक्त संचालक आर.के. सिंह, नगर निगम के अपर आयुक्त रणवीर कुमार, महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी सुनील सोलंकी, तथा आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त सुधीर कुमार श्रीवास्तव को जिला स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
सख्ती से होगी कार्रवाई
जिला स्तरीय गठित दल अपने अधीनस्थ अमलों के साथ मिलकर शहर के प्रमुख स्थानों, ट्रैफिक सिग्नलों और धार्मिक स्थलों का निरीक्षण करेंगे। भिक्षावृत्ति करने और भिक्षा देने वालों की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई जाएगी, और उनके खिलाफ पुलिस विभाग के सहयोग से नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही चिन्हित भिक्षुकों को आश्रय स्थल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, कोलार में स्थानांतरित किया जाएगा।







