मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने मंगलवार को दिल्ली विधानसभा में पिछली आप सरकार के प्रदर्शन पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की 14 रिपोर्टें पेश की हैं। इन रिपोर्टों में आप सरकार के दस वर्षों के कार्यकाल की समीक्षा की गई है। लंबे समय से प्रतीक्षित इन रिपोर्टों में राज्य के वित्त, सार्वजनिक स्वास्थ्य, वायु प्रदूषण नियंत्रण और शराब नीति जैसे अहम मुद्दों को शामिल किया गया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आरोप लगाया कि आप और कांग्रेस की सरकारों ने जनता की मेहनत की कमाई का दुरुपयोग किया है। उन्होंने कहा कि जिन सरकारों ने जनता का धन लूटा है, उन्हें हर पाई का हिसाब देना होगा।
आप सरकार ने दबाई सीएजी रिपोर्ट, भाजपा का आरोप
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पिछले गुरुवार को घोषणा की थी कि नई सरकार के पहले सत्र में ये रिपोर्टें सार्वजनिक की जाएंगी। भाजपा का आरोप है कि आप सरकार ने जानबूझकर इन ऑडिट रिपोर्टों को दबाए रखा ताकि वित्तीय कुप्रबंधन और प्रशासनिक विफलताओं को उजागर होने से रोका जा सके। इन रिपोर्टों में वित्तीय मामलों, सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना, वाहन प्रदूषण नियंत्रण और दिल्ली परिवहन निगम के कामकाज से जुड़े ऑडिट शामिल हैं।
‘शीश महल’ का जीर्णोद्धार विवाद
सबसे विवादास्पद खुलासों में से एक मुख्यमंत्री के सरकारी आवास के जीर्णोद्धार से संबंधित है, जिसे भाजपा ने ‘शीश महल’ नाम दिया है। सीएजी ऑडिट में परियोजना की योजना, टेंडर प्रक्रिया और निष्पादन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। 2020 में इस परियोजना के लिए 7.61 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे, लेकिन अप्रैल 2022 तक इसकी लागत बढ़कर 33.66 करोड़ रुपये हो गई। इस 342 प्रतिशत की वृद्धि पर भाजपा और कांग्रेस ने अरविंद केजरीवाल की आलोचना करते हुए सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
प्रदूषण नियंत्रण पर सवाल
सीएजी रिपोर्ट में दिल्ली में वाहन प्रदूषण नियंत्रण को लेकर कई खामियों की ओर इशारा किया गया है। रिपोर्ट मुख्य रूप से वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण पर केंद्रित है। मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, ऑडिट में शहर की वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली में खामियां, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) में गड़बड़ियां और पार्किंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आवंटित धन के अनुचित उपयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है।
मोहल्ला क्लीनिक योजना की समीक्षा
आप सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य योजना ‘मोहल्ला क्लीनिक’ भी जांच के दायरे में आई है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, 2016 से 2023 के बीच स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) को आवंटित बजट का केवल 28% ही मोहल्ला क्लीनिकों के निर्माण पर खर्च किया गया। सरकार ने 2017 तक 1,000 मोहल्ला क्लीनिक खोलने का लक्ष्य रखा था, लेकिन मार्च 2023 तक केवल 523 क्लीनिक ही चालू हो सके। इनमें से कई क्लीनिकों को कर्मचारियों की कमी और अपर्याप्त चिकित्सा उपकरणों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। ऑडिट में यह भी पाया गया कि पांच वर्षों में केवल 2% क्लीनिकों का ही निरीक्षण किया गया।
नई आबकारी नीति पर नुकसान
सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, आप सरकार को अपनी शराब नीति के कारण 2,026 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। शराब नीति बनाने से पहले विशेषज्ञों से सलाह ली गई थी, लेकिन उनकी सिफारिशों को नजरअंदाज किया गया। सरकार ने उन कंपनियों को लाइसेंस दिया जिनके खिलाफ शिकायतें थीं या जो घाटे में चल रही थीं। कोविड के नाम पर 144 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ कर दी गई, और कई महत्वपूर्ण निर्णय बिना कैबिनेट और उपराज्यपाल की मंजूरी के लिए गए।
सीएजी की प्रस्तुत की गई रिपोर्टों की पूरी सूची:
- मार्च 2021 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए राज्य वित्त लेखापरीक्षा रिपोर्ट।
- 31 मार्च 2020 और 2021 को समाप्त वर्षों के लिए राजस्व, आर्थिक, सामाजिक और सार्वजनिक उपक्रमों की लेखापरीक्षा रिपोर्ट।
- दिल्ली में वाहन वायु प्रदूषण की रोकथाम और शमन पर निष्पादन लेखापरीक्षा (2021)।
- देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों पर निष्पादन लेखापरीक्षा (2021)।
- मार्च 2022 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए राज्य वित्त लेखापरीक्षा रिपोर्ट।
- दिल्ली में शराब आपूर्ति पर निष्पादन लेखापरीक्षा।
- मार्च 2023 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए राज्य वित्त लेखापरीक्षा रिपोर्ट।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन पर निष्पादन लेखापरीक्षा।
- दिल्ली परिवहन निगम के कार्यों पर निष्पादन लेखापरीक्षा रिपोर्ट।
- 31 मार्च 2022 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए सीएजी की निष्पादन लेखापरीक्षा रिपोर्ट।
- 2021-22 के वित्तीय खाते।
- 2021-22 के विनियोग खाते।
- 2022-23 के वित्तीय खाते।
- 2022-23 का विनियोग लेखा।





