दिल्ली पुलिस ने जस्टिस यशवंत वर्मा के स्टोर रूम को सील किया

दिल्ली पुलिस ने जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पहुंचकर उनके स्टोर रूम और आसपास के इलाके को सील कर दिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, डीसीपी नई दिल्ली, देवेश कुमार महला अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे हैं। जांच कमेटी के निर्देशानुसार आग लगने वाली जगह को सील किया जा रहा है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से कथित रूप से आधी जली हुई नकदी बरामद होने से जुड़े मामले में दायर याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया। याचिका में दिल्ली पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ से वकील मैथ्यूज जे नेदुम्परा ने अनुरोध किया कि इस याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए, क्योंकि यह एक व्यापक जनहित का मामला है। इस पर सीजेआई ने कहा कि याचिका पर उचित समय पर सुनवाई होगी। वकील ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने सराहनीय कार्य किया है, लेकिन एफआईआर दर्ज किया जाना जरूरी है। इस पर सीजेआई ने टिप्पणी की, “सार्वजनिक बयान न दें।” मामले में एक महिला सह-याचिकाकर्ता ने कहा कि यदि यह मामला किसी आम नागरिक से जुड़ा होता, तो सीबीआई और ईडी जैसी कई एजेंसियां जांच में जुट जातीं। इस पर सीजेआई ने कहा, “यथोचित कार्रवाई की जाएगी।”
नेदुम्परा और तीन अन्य लोगों ने रविवार को एक याचिका दायर कर पुलिस को मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की है। कथित नकदी की बरामदगी 14 मार्च को रात करीब 11:35 बजे जस्टिस वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लगने के बाद हुई। मौके पर दमकल अधिकारी भी पहुंचे थे।
इस विवाद के चलते सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति वर्मा को उनके मूल न्यायालय, इलाहाबाद हाईकोर्ट वापस भेजने की सिफारिश की। 22 मार्च को सीजेआई ने आरोपों की आंतरिक जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया और दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय द्वारा तैयार जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने का निर्णय लिया। इस रिपोर्ट में कथित रूप से भारी मात्रा में नकदी मिलने की तस्वीरें और वीडियो शामिल थे। हालांकि, न्यायमूर्ति वर्मा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि न तो उन्होंने और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य ने स्टोर रूम में नकदी रखी थी। इस बीच, मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित इन-हाउस कमेटी के तीन सदस्यीय दल ने आरोपों की जांच के लिए न्यायमूर्ति वर्मा के आवास का दौरा किया।

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