ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के छत्तीसगढ़ प्रभारी सुखदेव सिंह सिद्धू ने बताया कि सरकार से मिले आश्वासन के बाद हड़ताल खत्म करने का निर्णय लिया गया है। इससे देश में बुधवार से स्थिति सामान्य हो जाएगी। हड़ताल के दौरान उत्तर और पश्चिम भारत के करीब दो हजार पेट्रोल पंपों में ईंधन का भंडार खत्म हो गया। पेट्रोलियम उद्योग से जुड़े लोगों ने बताया कि सरकारी तेल कंपनियों ने ट्रक चालकों की हड़ताल की आशंका के मद्देजनर देश भर के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर टैंक भर दिए थे, लेकिन राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पंजाब में कुछ पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ के कारण ईंधन खत्म हो गया। प्रशासन ने कई स्थानों पर सख्ती करते हुए ऐसे हड़तालियों पर कार्रवाई भी की, जिनके कारण गाड़ियां बीच रास्ते में रुकी हुई हैं। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों से बहस भी हुई। ड्राइवरों की हड़ताल से आवक ठप होने के कारण सब्जियां भी महंगी बिकीं। पेट्रोल पंप संचालकों ने बताया कि सामान्य दिनों की तुलना में डेढ़ दिन में ही दोगुने से ज्यादा पेट्रोल की बिक्री हो गई। हालांकि डीजल की बिक्री सामान्य दिनों से भी घट गई। ड्राइवरों की हड़ताल का असर स्कूल व कॉलेज की बसों पर भी पड़ा। पेट्रोल-डीजल नहीं मिलने के कारण बसें मंगलवार को नहीं चल सकीं। वहीं, सवारी बसों के पहिए भी थमे रहे। इससे लोग परेशान होते रहे। वहीं दूसरी ओर इसके चलते रेलवे स्टेशन में काफी भीड़ रही। बसें बंद होने का दबाव रेलवे स्टेशनों पर साफ नजर आया। यहां सामान्य दिनों की अपेक्षा लगभग दोगुने यात्री नजर आए। इसके चलते ट्रेनों में चढ़ने के लिए और सीट पाने के लिए आपाधापी की स्थिति बनी रही।
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