कांग्रेस की लोकसभा की 290 सीटों पर लड़ने की तैयारी, सीटों को लेकर चल रहा है बैठकों का दौर

आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कांग्रेस पार्टी में बैठकों का दौर शुरू हो गया है। इस दौरान कांग्रेस की गठबंधन समिति की आंतरिक बैठक की गई, जिसमें पार्टी ने 290 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। पार्टी के आंतरिक सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने देश में कांग्रेस की परंपरागत मजबूत सीटों पर उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने सीटों के बटवारे को लेकर एक कमेटी गठित की है। इस कमेटी ने 29 और 30 दिसंबर को मैराथन बैठक की थी और अलग-अलग राज्यों से बातचीत की थी। इस कमेटी के नेताओं ने 10 से ज्यादा राज्यों के नेताओं से मुलाकात की थी। सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस 290 से ज्यादा सीटों पर ‘एकला चलो रे’ के साथ चुनाव लड़ने पर विचार कर रही है। कांग्रेस हाईकमान का मानना है कि 2019 के चुनाव में जहां उसने जीत हासिल की थी, वहां वो फिर कैंडिडेट उतारेगे। इसके अलावा, जिन सीटों पर दूसरे नंबर पर आई थी, वहां भी अपने कैंडिडेट उतारने का मन बना लिया है। गठबंधन के प्रभाव वाले राज्यों में भी कांग्रेस चुनाव लड़ने का मन बना चुकी है। कांग्रेस की नेशनल अलायंस कमेटी ने सीटवार समीक्षा कर एक रिपोर्ट तैयार की है, और डेटा जुटाने के बाद जिन सीटों पर सहमति बनाई है, वहां किसी कीमत पर समझौता न करने की भी बात कही है। कांग्रेस से जुड़े नेताओं का कहना है कि पार्टी ने पिछले दो लोकसभा चुनाव के डेटा को ध्यान में रखकर फॉर्मूला तैयार किया है।

कांग्रेस की गठबंधन कमेटी ने बिहार, यूपी, उत्तराखंड, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, केरल, तमिलनाडु, पंजाब, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और झारखंड के नेताओं के साथ बैठकें की है। इन बैठकों की रिपोर्ट पार्टी आलाकमान को पहले ही दी जा चुकी है। कांग्रेस दिल्ली में 5, बिहार में 9 से 10, पंजाब में 8 से 9, तमिलनाडू में 9 से 11, यूपी में 10 से 15 सीट, पश्चिम बंगाल में 3 से 5, कश्मीर में 3, झारखंड में 9 और महाराष्ट्र में 24 से 26 सीटों पर लड़ने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस कल यानि 4 जनवरी को पार्टी मुख्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक करेगी। इसमें विभिन्न राज्यों के प्रमुखों को बुलाया गया है। इस बैठक को कांग्रेस की फाइनल मीटिंग के तौर पर माना जा रहा है, जिसमें सीट बंटवारे के फॉर्मूले पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। इसी रिपोर्ट को कांग्रेस गठबंधन के सहयोगी दलों के सामने रखेगी और सीटों पर सहमति के प्रयास किए जाएंगे।

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