
वित्त मंत्री ने बजट 2026-27 में भी पुरानी टैक्स व्यवस्था को समाप्त करने का कोई फैसला नहीं लिया है। ऐसे में करदाताओं के सामने सवाल है कि उन्हें पुरानी टैक्स रिजीम में बने रहना चाहिए या नई रिजीम को अपनाना चाहिए।
बजट के बाद आसान शब्दों में समझिए, 3.75 लाख रुपये तक की टैक्स छूट का पूरा गणित, स्टैंडर्ड डिडक्शन और होम लोन पर टैक्स से जुड़े सभी नियम।
वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट मध्यम वर्ग और वेतनभोगी करदाताओं की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका है। एक ओर जहां महंगाई और ब्याज दरों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, वहीं सरकार ने टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया और न ही नई छूट का एलान किया। भले ही 72 प्रतिशत करदाता नई टैक्स रिजीम में शिफ्ट हो चुके हों, लेकिन पुरानी टैक्स व्यवस्था को लेकर असमंजस अब भी बना हुआ है। आइए, बजट के बाद टैक्स से जुड़े आपके सभी सवालों के जवाब चार्टर्ड अकाउंटेंट से आसान भाषा में समझते हैं।
सवाल: बजट 2026 में वेतनभोगी वर्ग को टैक्स में क्या राहत मिली?
जवाब: साफ शब्दों में कहें तो इस बजट से मध्यम वर्ग और सैलरी पाने वालों को कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। उम्मीद की जा रही थी कि नई टैक्स रिजीम को ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा 75 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये की जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। स्टैंडर्ड डिडक्शन पहले की तरह 75 हजार रुपये ही बना हुआ है। इसके अलावा टैक्स स्लैब में भी कोई बदलाव नहीं किया गया।
सवाल: जब 72% करदाता नई रिजीम में आ चुके हैं, तो सरकार ने पुरानी रिजीम को खत्म क्यों नहीं किया?
जवाब: इस पर विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के लिए पुरानी टैक्स रिजीम को अचानक खत्म करना आसान नहीं है। अभी भी एक बड़ा वर्ग ऐसा है, जिसके लिए पुरानी व्यवस्था ज्यादा फायदेमंद साबित होती है। सरकार की रणनीति यह है कि पुरानी रिजीम को औपचारिक रूप से बंद करने के बजाय, समय के साथ उसे धीरे-धीरे अप्रासंगिक होने दिया जाए। जैसे-जैसे लोग खुद नई रिजीम को बेहतर समझकर अपनाएंगे, पुरानी व्यवस्था अपने आप समाप्त होती चली जाएगी।
सवाल: मेरे लिए कौन-सी टैक्स रिजीम बेहतर है, नई या पुरानी? गणित कैसे समझें?
जवाब: इसका फैसला पूरी तरह आपके इनकम और टैक्स छूट पर निर्भर करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, 12.75 लाख रुपये तक की सालाना आय वालों के लिए नई टैक्स रिजीम ज्यादा फायदेमंद है। लेकिन अगर आपकी सालाना आय 20 लाख रुपये या उससे अधिक है, तो आपको यह देखना होगा कि आप 80C, 80D, एचआरए और होम लोन ब्याज समेत कुल कितनी कटौती का दावा कर सकते हैं। यदि यह कटौती 3.75 लाख रुपये से ज्यादा है, तो पुरानी टैक्स रिजीम में आपका टैक्स बोझ कम पड़ेगा।
सवाल: होम लोन की ईएमआई भरने वालों को क्या कोई राहत दी गई है?
जवाब: नहीं। घर खरीदारों के लिए इस बजट में कोई नई राहत नहीं है। आयकर की धारा 24(b) के तहत सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी पर होम लोन ब्याज पर मिलने वाली 2 लाख रुपये की छूट सीमा कई सालों से जस की तस बनी हुई है। बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों को देखते हुए इसे 3 लाख रुपये किए जाने की उम्मीद थी, लेकिन बजट में ऐसा कोई बदलाव नहीं किया गया।
सवाल: अगर मेरी सालाना सैलरी 24 लाख रुपये है और मेरे पास खुद का घर है, तो मुझे क्या चुनना चाहिए?
जवाब: यदि आप नौकरी के कारण किसी दूसरे शहर में किराए पर रहते हैं और साथ ही होम लोन भी चला रहे हैं, तो पुरानी टैक्स रिजीम आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, 24 लाख रुपये की आय पर नई रिजीम में लगभग 4.1 लाख रुपये टैक्स बनता है। वहीं, पुरानी रिजीम में 80C के तहत 1.5 लाख रुपये, होम लोन ब्याज पर 2 लाख रुपये और अन्य मदों में करीब 3.8 लाख रुपये की कटौती करने पर टैक्स घटकर लगभग 3.1 लाख रुपये रह सकता है। यानी करीब 1 लाख रुपये की सीधी बचत।
सवाल: क्या सेविंग अकाउंट या एफडी के ब्याज पर टैक्स छूट बढ़ाई गई है?
जवाब: नहीं। छोटे निवेशकों को यहां भी निराशा हाथ लगी है। धारा 80TTA के तहत बचत खाते के ब्याज पर मिलने वाली 10 हजार रुपये की छूट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उम्मीद थी कि इसमें टर्म डिपॉजिट (एफडी) को भी शामिल किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वरिष्ठ नागरिकों को छोड़कर अन्य करदाताओं को एफडी के ब्याज पर अभी भी कोई अतिरिक्त टैक्स छूट नहीं मिलती।





