जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजने की अधिसूचना जारी; न्यायिक काम से दूर रहेंगे

सरकार की मंजूरी के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट में कार्यभार संभालने का निर्देश दिया गया है। विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग (नियुक्ति प्रभाग) ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है।

दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में अधजली नोटों की गड्डियां मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनका तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट में करने की सिफारिश की थी। सरकार ने शुक्रवार को इस सिफारिश पर मुहर लगा दी। अधिसूचना के अनुसार, “राष्ट्रपति ने भारत के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने का निर्णय लिया है।”
शुक्रवार को राष्ट्रपति ने उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय में पदभार संभालने का निर्देश दिया। दूसरी ओर, इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने जस्टिस यशवंत वर्मा के तबादले के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया था। आदेश जारी होने के बाद बार एसोसिएशन ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
हालांकि जस्टिस वर्मा का तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट में किया गया है, लेकिन उन्हें न्यायिक कार्य से फिलहाल दूर रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा नियुक्त तीन सदस्यीय समिति इस मामले की जांच कर रही है। जांच पूरी होने तक जस्टिस वर्मा को न्यायिक कार्य नहीं सौंपा जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने उनके तबादले को “स्वतंत्र निर्णय” बताया है। जस्टिस वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीशों में से एक थे और पूर्व में कई प्रशासनिक समितियों का हिस्सा भी रह चुके हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट की वेबसाइट पर 27 मार्च को प्रकाशित सूचना के अनुसार, 26 मार्च से सभी प्रशासनिक समितियों का पुनर्गठन किया गया है। कुछ दिन पहले दिल्ली में जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में आग लगने की घटना के बाद कई अधजली नोटों की गड्डियां बरामद हुई थीं। इस घटना से न्यायपालिका और राजनीति में हड़कंप मच गया। विपक्ष ने संसद में भी इस मुद्दे को उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। इस बीच, जस्टिस वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने 28 मार्च को खारिज कर दिया। मामला तब सामने आया जब 14 मार्च 2025 को उनके आधिकारिक निवास से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी, जिसे कथित रूप से जलाने का प्रयास किया गया था।
22 मार्च को मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर जस्टिस वर्मा से सभी कार्यभार वापस ले लिए गए थे और तीन सदस्यीय आंतरिक जांच समिति का गठन किया गया था। समिति के अध्यक्ष मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्णय लिया गया है, जिसमें नकदी की तस्वीरें और वीडियो भी शामिल हैं। जस्टिस वर्मा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि न तो उन्होंने और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य ने स्टोररूम में नकदी रखी थी।

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