जयपुर। चैत्र नवरात्र के पहले दिन आज नवसंवत्सर 2082 का स्वागत करते हुए घरों और मंदिरों में घट स्थापना की गई। विशेष योग संयोग में मंत्रोच्चार के साथ घट स्थापना और ध्वजारोहण किया गया। घट स्थापना होते ही देवालयों में घंटे, घड़ियाल, शंख और नगाड़ों की ध्वनि गूंज उठी। इस दौरान माता रानी के जयकारे भी गूंजने लगे। नवरात्र के पहले दिन माता के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा-अर्चना की गई। देवी मंदिरों में माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए सुबह से ही लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। आमेर घाटी में स्थित मनसा माता, दुर्गापुरा के दुर्गामाता मंदिर, पुरानी बस्ती के रूद्र घंटेश्वरी, मानबाग स्थित राजराजेश्वरी माता, झालाना डूंगरी स्थित कालक्या माता और राजापार्क स्थित वैष्णो माता मंदिर में घट स्थापना के साथ दुर्गा सप्तशती के पाठ किए जा रहे हैं। वहीं, राम मंदिरों में वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस के पाठ प्रारंभ हो गए हैं।
शिला माता मंदिर में श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब
आमेर स्थित शिला माता मंदिर में अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना की गई। घट स्थापना के बाद जैसे ही पट खुले, चारों ओर माता के जयकारे गूंज उठे। मंदिर पुजारी बनवारी लाल शास्त्री ने बताया कि नवरात्र में मंदिर प्रतिदिन सुबह 6 से दोपहर 12.30 बजे तक और शाम 4 से रात 8.30 बजे तक भक्तों के लिए खुला रहेगा। दुर्गापुरा स्थित दुर्गामाता मंदिर में महंत महेन्द्र भट्टाचार्य के सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ घट स्थापना की गई और दुर्गा सप्तशती के पाठ संपन्न हुए। नवरात्र के आठ दिनों तक माता के दरबार में अखंड ज्योत के दर्शन होंगे।
अन्य स्थानों पर भी घट स्थापना
आमेर रोड स्थित कनक घाटी के श्री देवी मनसा माता मंदिर में नवरात्र महोत्सव का शुभारंभ हुआ। गोविंद देवजी मंदिर के महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में नवरात्र स्थापना के बाद चंडी पाठ, शृंगार, भोग आरती और पुष्पांजलि जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्री खोले के हनुमान मंदिर में भी घट स्थापना के साथ चैत्र नवरात्र उत्सव का आगाज हुआ, जिसमें मंत्रोच्चारण और वाल्मीकि रामायण के अखंड पारायण प्रारंभ किए गए। सांगानेरी गेट स्थित काली माता मंदिर में पं. भुनेश्वर प्रसाद शर्मा के सान्निध्य में ध्वजारोहण कर घट स्थापना की गई।






