कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक के मामले बढ़े, मोटे लोगों में खतरा अधिक

20 साल से कम उम्र के युवाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों ने लोगों के बीच चिंता और डर का माहौल पैदा कर दिया है। अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या दिल का दौरा अब किसी भी उम्र के व्यक्ति को नहीं छोड़ता? बच्चे, युवा और वयस्क – सभी आयु वर्ग के लोग इस घातक स्थिति की चपेट में आ रहे हैं।
अब हृदय रोग और उससे जुड़ी बीमारियां किशोरों को भी प्रभावित करने लगी हैं। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ होता है कि 20 साल से कम उम्र के युवाओं में भी हार्ट अटैक और हृदय संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं।
हाल ही का मामला मध्य प्रदेश के इंदौर का है, जहां एक 18 वर्षीय छात्र, जो आईआईटी की तैयारी कर रहा था, की हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई। वह 11वीं कक्षा का छात्र था और देर रात तक पढ़ाई कर रहा था, जब अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उसे तुरंत अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जांच में मृत्यु का कारण हार्ट अटैक बताया गया है। इसी तरह, 6 अप्रैल को भी इंदौर के द्वारकापुरी में एक अन्य 18 वर्षीय युवक की हार्ट अटैक से जान चली गई थी। रात को सीने में तेज दर्द और घबराहट की शिकायत के बाद परिजन उसे अस्पताल ले गए, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। इन घटनाओं ने इस सवाल को और गंभीर बना दिया है कि क्या अब कोई भी व्यक्ति हार्ट अटैक से सुरक्षित नहीं है?

बच्चों में भी देखे जा रहे हार्ट अटैक के मामले
कुछ समय पहले तक हृदय रोगों को वृद्धावस्था से जुड़ी समस्या माना जाता था, लेकिन अब हर उम्र के लोगों में यह खतरा बढ़ता दिख रहा है। हाल के वर्षों में छोटे बच्चों में भी हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट के मामले सामने आए हैं। सितंबर 2023 में गुजरात में छठी कक्षा के एक 12 वर्षीय बच्चे की अचानक दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी।

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
नेशनल सेंटर फॉर हेल्थ स्टैटिस्टिक्स (NCHS) के मुताबिक, वर्ष 2019 में अमेरिका में 18 से 40 वर्ष के सिर्फ 0.3% वयस्कों को हार्ट अटैक आया था। हालांकि यह संख्या कम मानी जाती है, लेकिन पिछले चार-पांच वर्षों में इसमें तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। कोलंबिया विश्वविद्यालय के हृदय रोग विशेषज्ञ और महामारी वैज्ञानिक डॉ. एंड्रयू मोरन का कहना है कि दुनियाभर में हृदय रोगों के बढ़ने के पीछे मोटापा एक प्रमुख कारण हो सकता है। अगर शरीर का वजन नियंत्रित रखा जाए तो दिल की बीमारियों का जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।

मोटापा और हृदय रोग का संबंध
विशेषज्ञों के अनुसार, मोटापा उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल और टाइप-2 डायबिटीज जैसी बीमारियों को जन्म देता है, जो हृदय रोग का खतरा बढ़ाते हैं। शोध बताते हैं कि मोटापा डायस्टोलिक डिसफंक्शन का कारण बनता है, जिससे हार्ट फेलियर हो सकता है। मोटे व्यक्तियों में हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल का खतरा अधिक होता है, जो अंततः हार्ट अटैक का कारण बन सकता है।

इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ट अटैक के कुछ लक्षण इतने सूक्ष्म होते हैं कि लोग उन्हें सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। अगर आपको लगातार थकान महसूस हो रही है, सांस लेने में कठिनाई हो रही है या बिना किसी मेहनत के अधिक पसीना आ रहा है, तो यह संकेत हृदय रोग की ओर इशारा कर सकते हैं। ऐसे लक्षणों को हल्के में न लें और समय पर जांच कराएं।

नोट: संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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