अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार संघीय एजेंसियों में कर्मचारियों की छंटनी कर रहे हैं और विविधता से जुड़े कार्यक्रमों को समाप्त किया जा रहा है। अब इस अभियान की आंच नासा तक भी पहुंच गई है। ट्रंप के आदेश के तहत नासा ने भारतीय मूल की अधिकारी नीला राजेंद्र को पद से हटा दिया है।
नीला राजेंद्र नासा में विविधता, समानता और समावेशन (डीईआई) कार्यक्रम की प्रमुख थीं। मार्च में ट्रंप के एक कार्यकारी आदेश के बाद यह विभाग बंद कर दिया गया था। इसके बाद नासा ने उन्हें ‘टीम उत्कृष्टता और कर्मचारी सफलता कार्यालय’ की प्रमुख नियुक्त किया। इस नई जिम्मेदारी की जानकारी नासा ने 10 मार्च को एक ईमेल के माध्यम से दी थी।
नीला राजेंद्र ने तब लिंक्डइन पर लिखा था कि उनकी नई भूमिका नासा में सामूहिक कार्य की क्षमता को मजबूत करने पर केंद्रित होगी। लेकिन अप्रैल की शुरुआत में ट्रंप के सख्त फैसलों के चलते उन्हें नासा से पूरी तरह बर्खास्त कर दिया गया।
पिछले हफ्ते नासा की जेट प्रोपल्शन प्रयोगशाला (जेपीएल) ने एक ईमेल जारी कर कर्मचारियों को इस बारे में सूचित किया। जेपीएल की निदेशक लॉरी लेशिन ने ईमेल में लिखा कि नीला राजेंद्र अब प्रयोगशाला का हिस्सा नहीं हैं, और उनके योगदान के लिए हम उनके आभारी हैं।
ट्रंप द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि विविधता से संबंधित कार्यक्रम अमेरिकी समाज को नस्ल, रंग और लिंग के आधार पर विभाजित करते हैं, जिससे करदाताओं का पैसा व्यर्थ होता है और भेदभाव को बढ़ावा मिलता है।
नीला राजेंद्र कई वर्षों से नासा में नेतृत्व की भूमिका में थीं और उन्होंने “स्पेस वर्कफोर्स 2030” जैसे कार्यक्रमों की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य महिलाओं और अल्पसंख्यकों को नासा में शामिल करना था।
अमेरिका में नासा के अधिकारियों-कर्मचारियों की छंटनी, भारतीय मूल की डीईआई प्रमुख बर्खास्त





