प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के पति और व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा को हरियाणा के शिकोहपुर में ज़मीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के लिए मंगलवार को तलब किया। 56 वर्षीय वाड्रा को इस मामले में पहली बार 8 अप्रैल को समन भेजा गया था, लेकिन वे उस दिन पेश नहीं हुए थे। इस बार वे समन के अनुसार मंगलवार सुबह ईडी कार्यालय पहुंचे। ईडी यह जांच उनकी कंपनी ‘स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी’ द्वारा फरवरी 2008 में ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से खरीदी गई 3.5 एकड़ ज़मीन की खरीद-फरोख्त को लेकर कर रही है। बताया गया है कि यह ज़मीन 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी गई थी और बाद में डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दी गई। ईडी के अनुसार, वाड्रा से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत पूछताछ की जाएगी। इससे पहले भी एक अन्य मनी लॉन्ड्रिंग केस में एजेंसी वाड्रा से पूछताछ कर चुकी है।
सरकार बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है: वाड्रा
ईडी दफ्तर पहुंचने से पहले वाड्रा ने मीडिया से कहा कि सरकार उन पर राजनीतिक दबाव बना रही है और उन्हें परेशान करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि मेरी गलती क्या है। मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है और मुझे कुछ भी छिपाने की ज़रूरत नहीं है। यह सब मुझे फंसाने की साजिश है।” वाड्रा ने यह भी बताया कि पिछले 20 सालों में उन्हें 15 बार बुलाया गया है और हर बार 10 घंटे से ज़्यादा पूछताछ की गई है। अब तक वे 23,000 से अधिक दस्तावेज़ जमा कर चुके हैं।
राजनीति में आने की इच्छा जताई
हाल ही में रॉबर्ट वाड्रा ने संकेत दिया कि वे राजनीति में कदम रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस पार्टी और उनका परिवार उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने की अनुमति देता है, तो वे राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने के लिए तैयार हैं। वाड्रा ने यह भी कहा कि उनका राजनीति से नाता काफी हद तक गांधी परिवार से उनके संबंध के चलते है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि अक्सर उनके नाम का इस्तेमाल राजनीतिक बहसों में ध्यान भटकाने के लिए किया जाता है।





