सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के मंत्री सेंथिल बालाजी को कड़ा निर्देश देते हुए कहा कि उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना होगा, अन्यथा उनकी जमानत रद्द की जा सकती है। यह टिप्पणी बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति एजी मसीह की पीठ ने की। कोर्ट ने बालाजी को मंत्री पद और जमानत में से एक विकल्प चुनने को कहा, क्योंकि उनके मंत्री बने रहने से मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गवाहों पर दबाव डालने की संभावना है। कोर्ट ने उन्हें सोमवार तक अपना निर्णय लेने का समय दिया है।
कोर्ट ने मंत्री पद की शपथ लेने पर जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान पीठ ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई कि बालाजी ने जमानत मिलने के तुरंत बाद मंत्री पद की शपथ ले ली थी। जस्टिस ओका ने बालाजी के अधिवक्ता मुकुल रोहतगी से पूछा कि उन्हें मंत्री पद और जमानत के बीच चयन करना होगा। इस दौरान उन्होंने पिछले फैसलों में की गई टिप्पणियों का भी उल्लेख किया।
‘जमानत गुण दोष के आधार पर नहीं दी गई’
जस्टिस ओका ने कहा कि उन्हें जमानत गुण दोष के आधार पर नहीं, बल्कि अनुच्छेद 21 के उल्लंघन के कारण दी गई थी। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सेंथिल बालाजी ने जमानत के लिए दलील दी थी कि उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर उन्हें प्रभावित किए जाने की आशंका है, तो मुकदमे को राज्य से बाहर स्थानांतरित किया जा सकता है। यह बात कपिल सिब्बल ने बालाजी की ओर से पेश होते हुए कही। इस पर जस्टिस ओका ने कहा कि इससे उद्देश्य पूरा नहीं होगा, क्योंकि मामले में एक हजार गवाह हैं।
प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें जून 2023 में गिरफ्तार किया था, और सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर 2024 को लंबी हिरासत और मुकदमे में देरी के आधार पर जमानत दी थी।
जमानत मिलने पर ली थी मंत्री पद की शपथ
जमानत मिलने के तीन दिन बाद, 29 सितंबर 2024 को बालाजी को तमिलनाडु की डीएमके सरकार में फिर से बिजली, गैर-पारंपरिक ऊर्जा, और उत्पाद शुल्क विभागों के मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया। सेंथिल बालाजी पर 2011-2015 के दौरान एआईएडीएमके सरकार में परिवहन मंत्री रहते हुए “नौकरी के बदले नकद” घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं।





