जीएनएसएस आधारित टोल वसूली प्रणाली को कुछ समय पहले एनएच-275 (बैंगलुरू-मैसूर) और एनएच-709 (पानीपत-हिसार) हाइवे पर परीक्षण के रूप में लागू किया गया था, जिसके परिणाम बहुत सकारात्मक रहे थे। इसके बाद, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इसे पूरे देश में लागू करने का निर्णय लिया है। आज से, टोल कलेक्शन के लिए एक नई व्यवस्था लागू हो गई है। यदि आप हाईवे पर यात्रा कर रहे हैं, तो आपकी गाड़ी से टोल अपने आप कट जाएगा। इसके लिए, आज से ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) को लागू किया गया है, जो GPS सिस्टम के तहत काम करेगा। इसके लिए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने नए नियम जारी किए हैं। इन नियमों के अनुसार, GNSS से लैस निजी वाहनों को 20 किलोमीटर तक कोई टैक्स नहीं देना होगा। इसके बारे में एक अधिसूचना जारी की गई है।
फायदा कैसे और किसे मिलेगा: राष्ट्रीय परमिट वाले वाहनों को छोड़कर, यदि किसी अन्य जीपीएस-सुसज्जित वाहन का मालिक राष्ट्रीय हाइवे पर यात्रा करता है, तो उसे एक दिन में हर दिशा में 20 किलोमीटर तक के सफर पर कोई टोल शुल्क नहीं देना होगा। इसके अलावा, वाहन को जितनी दूरी तक का सफर करना होगा, उतनी दूरी का ही टोल लिया जाएगा। लेकिन इसका लाभ केवल उस गाड़ी को मिलेगा जो GNSS से लैस होगी। वाहन मालिक को अपनी गाड़ी में ऑन-बोर्ड यूनिट (OBU) या ट्रैकिंग डिवाइस लगवाना होगा, जिसकी कीमत 4,000 रुपये होगी। फिलहाल, यह व्यवस्था हाइब्रिड मोड में चलेगी, यानी कैश, फास्टैग और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) पर काम करेगी।
1 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है रेवेन्यू: जीएनएसएस आधारित टोल वसूली प्रणाली को कुछ समय पहले एनएच-275 (बैंगलुरू-मैसूर) और एनएच-709 (पानीपत-हिसार) हाइवे पर परीक्षण के रूप में लागू किया गया था, और इसके परिणाम बहुत अच्छे रहे थे। इसके बाद, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इसे पूरे देश में लागू करने का निर्णय लिया है। वर्तमान में, नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को लगभग 40,000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू टोल के माध्यम से मिलता है। नए सिस्टम के लागू होने के बाद, यह बढ़कर 1 लाख 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है।
देश में लागू हुआ नया टोल कलेक्शन सिस्टम, 20 KM तक नहीं देना होगा टोल टैक्स





