पहलगाम हमले पर भारत की सख्त प्रतिक्रिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से आतंकियों के सरगनाओं को कल्पना से परे सज़ा देने के संकल्प ने पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा दिया है। इस दबाव में आकर पाकिस्तान ने अमेरिका से हस्तक्षेप की मांग की है।
बुधवार को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत की और आग्रह किया कि अमेरिका भारत पर दबाव बनाए ताकि वह जिम्मेदारी से व्यवहार करे। पाकिस्तान सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि बातचीत के दौरान शहबाज शरीफ ने आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के बलिदानों का जिक्र करते हुए बताया कि देश ने अब तक 90,000 से ज्यादा लोगों की जान गंवाई है और 152 अरब डॉलर से अधिक का आर्थिक नुकसान उठाया है। शरीफ ने यह भी दावा किया कि भारत की कार्रवाई का उद्देश्य पाकिस्तान की उन कोशिशों से ध्यान भटकाना है जो वह अफगानिस्तान की धरती से संचालित आतंकी संगठनों से निपटने के लिए कर रहा है। उन्होंने सिंधु जल संधि का मुद्दा भी उठाया और कहा कि यह 240 मिलियन लोगों की जीवन रेखा है और इसमें किसी भी पक्ष के पास एकतरफा हटने का अधिकार नहीं है। इससे पहले अमेरिका ने कहा था कि तनाव को कम करने के लिए रुबियो अगले 24 घंटे में भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों से बात करेंगे। इसी के तहत उन्होंने शहबाज शरीफ से बात की और अब भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से संपर्क करेंगे।
संयुक्त राष्ट्र से भी लगाई गुहार
भारत की संभावित कार्रवाई को लेकर डरे शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी मदद की अपील की। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि उन्होंने गुटेरेस से फोन पर बात कर पाकिस्तान की आतंकवाद के खिलाफ प्रतिबद्धता जताई, भारत के आरोपों को खारिज किया और पहलगाम हमले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, शरीफ ने गुटेरेस से अनुरोध किया कि वे भारत से संयम बरतने और ज़िम्मेदारी से काम करने की अपील करें। शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान शांति के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन अगर चुनौती दी गई तो वह अपनी संप्रभुता की पूरी ताकत से रक्षा करेगा।






