प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण फैसलों के साथ-साथ जातिगत जनगणना कराने का निर्णय भी लिया गया।
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने यह बड़ा ऐलान किया है कि अब देश में जातिगत जनगणना कराई जाएगी। लंबे समय से विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार पर दबाव बना रहा था और अब सरकार का यह कदम राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पहले भी इस मुद्दे पर मोदी सरकार को घेर चुके हैं।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी जानकारी
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने यह फैसला लिया है कि आगामी जनगणना में जातिगत आंकड़े भी शामिल किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह फैसला समाज के सभी वर्गों की भलाई के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले केंद्र सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को 10% आरक्षण दिया था जिससे अन्य वर्गों पर कोई असर नहीं पड़ा। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर जातिगत सर्वे किया है, लेकिन पूरे देश के स्तर पर समग्र दृष्टिकोण जरूरी है।
कांग्रेस पर लगाए आरोप
अश्विनी वैष्णव ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने वर्षों तक जातिगत जनगणना का विरोध किया और आज तक इसे नहीं कराया। 2010 में मनमोहन सिंह सरकार ने इसका आश्वासन तो दिया था लेकिन अमल नहीं किया।
राजद नेता तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार के इस फैसले को अपनी पार्टी और लालू प्रसाद यादव की वैचारिक जीत बताया। उन्होंने कहा कि पहले जब हम पीएम से मिले थे तो उन्होंने जातिगत जनगणना से इनकार कर दिया था, लेकिन आज सरकार को हमारे एजेंडे पर काम करना पड़ रहा है। तेजस्वी ने आगे कहा कि अब अगली लड़ाई पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित सीटों की होगी, जैसे दलित और आदिवासियों को मिलती हैं।
कांग्रेस ने भी जताई खुशी
कांग्रेस नेता उदित राज ने भी केंद्र सरकार के इस फैसले को कांग्रेस की जीत बताया और कहा कि मोदी सरकार को आखिरकार जाति जनगणना करानी ही पड़ी।



