दिल्ली सरकार निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर रोक लगाने के लिए “स्कूल फीस रेगुलेशन एक्ट” लेकर आ रही है। इस बिल को जल्द ही विधानसभा में पेश किया जाएगा। नए कानून के लागू होने के बाद निजी स्कूल अपनी मनमर्जी से फीस नहीं बढ़ा पाएंगे। नियम तोड़ने पर स्कूल की मान्यता रद्द हो सकती है और 1 से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
सीएम रेखा गुप्ता की कैबिनेट ने दी मंजूरी
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक में इस बिल के ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई। इस कानून का उद्देश्य स्कूल फीस में पारदर्शिता लाना और अनियमित बढ़ोतरी को रोकना है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इससे अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी।
फीस बढ़ोतरी पर सख्ती, स्कूल की मान्यता भी रद्द हो सकेगी
अगर कोई स्कूल इस कानून का उल्लंघन करता है, तो उस पर जुर्माने के साथ-साथ मान्यता रद्द करने और स्कूल का प्रबंधन सरकार के अधीन लेने तक की कार्रवाई की जा सकेगी। फीस न देने पर बच्चों को कक्षा से बाहर बैठाने पर भी सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
स्कूलों की शिकायतों के बाद सरकार एक्शन में
हाल के दिनों में कुछ स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि और बच्चों को निकालने जैसी शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद जिला उपायुक्तों को जांच का निर्देश दिया गया। जांच के बाद कई स्कूलों का ऑडिट हुआ और विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई।
पहले नहीं था फीस नियंत्रण का कोई स्पष्ट कानून
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट 1973 में फीस बढ़ोतरी पर नियंत्रण का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था। अब पहली बार 1677 निजी स्कूलों पर नियंत्रण लाने के लिए एक स्पष्ट और मजबूत कानून लाया जा रहा है।
150 स्कूलों को भेजे गए नोटिस
सरकार ने बताया कि 28 अप्रैल तक 970 स्कूलों का निरीक्षण हुआ और 150 से अधिक को नोटिस दिए गए। 42 स्कूलों में डमी क्लास चलाई जा रही थी, जिन पर कार्रवाई की गई। किताबों और यूनिफॉर्म को लेकर भी 300 से अधिक शिकायतें सुलझाई गईं।
तीन स्तरीय समिति व्यवस्था लागू होगी
- स्कूल स्तर पर: हर स्कूल में फीस रेगुलेशन कमेटी बनेगी जिसमें स्कूल प्रबंधक, प्रधानाचार्य, शिक्षक, पांच अभिभावक (SC/ST और महिला प्रतिनिधि सहित) और शिक्षा निदेशक शामिल होंगे।
- जिला स्तर पर: जिला फीस अपीलीय समिति बनेगी जिसकी अध्यक्षता डिप्टी डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन करेंगे। यह समिति 30-45 दिनों में फैसला देगी।
- राज्य स्तर पर: राज्य समिति का नेतृत्व शिक्षा निदेशक करेंगे। इसमें चार्टर्ड अकाउंटेंट, शिक्षाविद, निजी स्कूल विशेषज्ञ और अभिभावक शामिल होंगे।
15 जुलाई तक स्कूल स्तर की कमेटियां बनाई जाएंगी और 31 जुलाई तक फीस प्रस्ताव तैयार करेंगे। 15 सितंबर तक उस पर फैसला होगा और 30 सितंबर तक जिला समिति को भेजा जाएगा। इससे अगले सत्र से पहले ही फीस की जानकारी अभिभावकों को मिल जाएगी और वे सुझाव या आपत्ति दर्ज करा सकेंगे।






